डीडीयू रेलवे परिसर में HIV संक्रमण का बढ़ता खतरा, 10 नए मरीज ट्रेस होने से स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

जागरूकता ही बचाव है, यह बात सालों से कही जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अज्ञानता और लापरवाही आज भी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। लोग न सिर्फ अपनी, बल्कि अपने पूरे परिवार की सेहत को खतरे में डाल रहे हैं और इसका ताजा उदाहरण एचआईवी संक्रमण के लगातार बढ़ते मामले हैं।

एचआईवी जागरूकता और रोकथाम के लिए कार्यरत टीआई यूपी एएमपी प्लस की टीम ने सितंबर से दिसंबर के बीच डीडीयू रेलवे परिसर में 10 एचआईवी संक्रमित मरीजों को ट्रेस किया है। इनमें घुमंतू युवक-युवतियों के साथ कुछ रेलकर्मी भी शामिल हैं, जिससे खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है।

संस्था के परियोजना निदेशक राकेश सिंह के अनुसार, सभी संक्रमित मरीजों का इलाज चंदौली स्थित एआरटी सेंटर में कराया जा रहा है। फिलहाल जिले में कुल 68 एचआईवी संक्रमित मरीजों का इलाज जारी है।

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025-26 में अब तक 32 नए एचआईवी मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं, जबकि 2024-25 में यह संख्या 68 थी। संस्था द्वारा किए गए सर्वे और फील्ड वर्क के आधार पर डीडीयू जंक्शन समेत काली महाल, चंदासी, दुलहीपुर, पड़ाव चौराहा, चहनियां, नौबतपुर जैसे कुल 10 संवेदनशील जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां एचआईवी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

डीडीयू रेलवे परिसर में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी राजेश सिंह ने बताया कि एचआईवी संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर देता है, जिससे व्यक्ति कमजोर होता जाता है और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि पंडित कमलापति त्रिपाठी हॉस्पिटल चंदौली, राजकीय महिला चिकित्सालय मुगलसराय सहित कई सरकारी अस्पतालों में एआरटी सेंटर स्थापित हैं, जहां एचआईवी की जांच और इलाज की पूरी सुविधा मुफ्त में उपलब्ध है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि असुरक्षित यौन संबंधों से बचें, संक्रमित खून न चढ़वाएं और किसी भी तरह के संदेह की स्थिति में बिना देरी जांच कराएं। क्योंकि एचआईवी से बचाव का सबसे मजबूत हथियार सिर्फ और सिर्फ जागरूकता और सतर्कता है।

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