मध्य प्रदेश के शिवपुरी में अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या के बाद पूरे प्रदेश में वकील समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा है। जगह-जगह रैलियां, प्रदर्शन और न्यायालयीन कार्य का बहिष्कार किया जा रहा है। जबलपुर से लेकर इंदौर और छतरपुर तक अधिवक्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया और सुरक्षा कानून की मांग को लेकर सरकार को चेतावनी दी।
जबलपुर में वकीलों ने अदालती कामकाज से विरत रहकर रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट तत्काल लागू करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने दिवंगत अधिवक्ता संजय सक्सेना के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा, आश्रित को सरकारी नौकरी और आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग रखी। साथ ही सरकार को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर भोपाल में अनशन और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के आह्वान पर पूरे प्रदेश में वकील न्यायालयीन कार्य से दूर रहे। इंदौर में जिला कोर्ट और हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी कामकाज का बहिष्कार किया। इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने कहा कि वर्ष 2012 से लगातार अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। वकीलों का कहना है कि यदि जल्द कानून लागू नहीं किया गया तो आंदोलन और व्यापक होगा।
छतरपुर में विरोध और उग्र हो गया। वकीलों ने चक्काजाम किया, बैरिकेड तोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया और जमकर नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि एक घंटे तक इंतजार के बावजूद कलेक्टर के नहीं पहुंचने पर आक्रोश बढ़ गया। कई अधिवक्ताओं ने निर्वस्त्र होकर विरोध जताया और शहर के मुख्य चौराहे पर जाम लगा दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि डायल 100 वाहन को भी मौके से लौटना पड़ा।
पूरे घटनाक्रम की जड़ में शिवपुरी के करैरा में हुई वह सनसनीखेज वारदात है, जहां अधिवक्ता संजय सक्सेना को सागर ताल और आनंद सागर मंदिर के पास घात लगाकर बदमाशों ने गोली मार दी थी। परिजनों का आरोप है कि यह हत्या जमीन विवाद से जुड़ी है और केस जीतने के बाद विपक्षी पक्ष ने सुपारी देकर वारदात कराई। पुलिस जांच में दस लाख रुपये की सुपारी और दो लाख एडवांस देने की बात सामने आई है। शॉर्ट एनकाउंटर में तीन शूटर गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें एक घायल हुआ है, जबकि कुल पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच जारी है, लेकिन वकील समुदाय का आक्रोश फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।

