लखनऊ. उत्तर प्रदेश की सियासत में शंकराचार्य के मुद्दे को लेकर घमासान तेज हो गया है। पक्ष और विपक्ष के बीच जारी जुबानी जंग के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषा शैली पर सवाल उठाते हुए उनके योगी होने की योग्यता तक पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि गुरु समान शंकराचार्य से सर्टिफिकेट मांगना और सदन में वयोवृद्ध महिला के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करना नैतिकता और शिष्टाचार की सीमाओं को तोड़ना है। उन्होंने तंज कसते हुए सीएम को “करप्ट माउथ” तक कह दिया। इसके बाद उन्होंने बौद्धकालीन जातक कथा के नीले सियार की कहानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक सियार नील के टब में गिरकर नीला हो गया और जंगल के जानवरों ने उसे भगवान का दूत समझकर राजा बना दिया, लेकिन जब उसने अपनी असली आवाज निकाली तो उसका भेद खुल गया। अखिलेश यादव ने कहा कि आज के सीएम भी कुछ ऐसे ही हैं।
उन्होंने आगे दावा किया कि अजय सिंह बिष्ट के शुरुआती जीवन में पारिवारिक परिवहन व्यवसाय से जुड़े रहने की बात मीडिया रिपोर्टों में सामने आई थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अवैद्यनाथ ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को गोरखनाथ पीठ का उत्तराधिकारी बनाया, जबकि वहां हजारों संन्यासी मौजूद थे। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या यह फैसला केवल योग्यता के आधार पर था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था।
उन्होंने पूछा कि मठ में उत्तराधिकारी चुनने की क्या कोई औपचारिक प्रक्रिया हुई थी और क्या कुछ ही वर्षों में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना केवल संयोग था। अंत में उन्होंने कहा कि पद और परिधान समय और रिश्तों से मिल सकते हैं, लेकिन भाषा और व्यवहार व्यक्ति की असली पहचान बताते हैं।
इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है और सियासी माहौल गर्माया हुआ है।

