भोपाल। कांग्रेस संगठन के लिए ’51’ का टारगेट अब सियासी सिरदर्द बनता जा रहा है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि जिला कार्यकारिणी में 51 से ज्यादा सदस्य नहीं होने चाहिए, लेकिन इस नए फार्मूले ने संगठन के भीतर नई उलझन खड़ी कर दी है। पहले जहां बड़ी-बड़ी कार्यकारिणियां बनाई जा रही थीं, अब अचानक संख्या घटाने का दबाव आ गया है, जिससे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति बनती नजर आ रही है।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इस स्थिति पर कहा कि जिला कार्यकारिणी के गठन की पूरी तैयारी हो चुकी थी और सभी नाम मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिए गए थे, लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद अब दोबारा पूरी प्रक्रिया करनी पड़ेगी। उनका कहना है कि संख्या बढ़ाना आसान होता है लेकिन घटाना सबसे बड़ी चुनौती है और हाईकमान के संदेश का मतलब यह है कि कार्यकारिणी छोटी और प्रभावी होनी चाहिए, जिसमें वजनदार नेताओं को जगह मिले। उन्होंने यह भी कहा कि वक्त के हिसाब से बाद में विस्तार किया जाएगा और जिन्हें यहां जगह नहीं मिलेगी, उन्हें संगठन में दूसरी जिम्मेदारियों में एडजस्ट किया जाएगा, जबकि जिन छह जिलों में कार्यकारिणी बन चुकी है, वे नए निर्देश के दायरे में नहीं आएंगे।
इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और खास तौर पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा सियासी हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता अजय यादव ने कहा कि जीतू पटवारी का नेतृत्व पूरी तरह असफल हो चुका है और कांग्रेस के भीतर अब सारे फैसले दिल्ली से हो रहे हैं। उनके मुताबिक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो या जिला कार्यकारिणी और प्रवक्ताओं का चयन, हर फैसला हाईकमान तय कर रहा है और प्रदेश अध्यक्ष सिर्फ दिखावे के लिए बचे हैं। उन्होंने छिंदवाड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 250 पदाधिकारी बना दिए गए और अब किसी को हटाने की हिम्मत नहीं है, जिससे कांग्रेस का संगठन तमाशा बनकर रह गया है और वह जनता के बीच एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने में भी नाकाम साबित हो रही है।

