होली पर ‘बर्तन प्रथा’ खत्म, उल्लंघन पर 5000 का जुर्माना; सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा फैसला

इछावर (सीहोर)। अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए होली पर चली आ रही ‘बर्तन प्रथा’ को पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें समाज के वरिष्ठजन और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि कोई परिवार इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसी परंपराएं सामाजिक भेदभाव को भी बढ़ावा देती हैं, इसलिए अब इन्हें समाप्त करना समय की जरूरत है।

बताया गया कि मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में होली के अवसर पर ‘बर्तन बदलने’ की परंपरा लंबे समय से चली आ रही थी। इस प्रथा के तहत पुराने मिट्टी के बर्तनों को बदलकर नए बर्तन उपयोग में लाए जाते थे, जिसे नई शुरुआत और शुद्धता का प्रतीक माना जाता था।

ग्राम पंचायत खेरी के प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना आवश्यक है। होली प्रेम, सद्भाव और सादगी का त्योहार है, इसे दिखावे और खर्च की प्रतिस्पर्धा से दूर रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कदमों से समाज में समानता आएगी और युवाओं को भी सादगीपूर्ण जीवन की प्रेरणा मिलेगी।

समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माने से प्राप्त राशि का उपयोग सामूहिक सामाजिक कार्यों और विकास गतिविधियों में किया जाएगा। इस निर्णय की चर्चा अब आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है और इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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