फिल्म की शुरुआत एक सीधे लेकिन गहरे सवाल से होती है कि क्या महिलाओं की खूबसूरती ही उनका सबसे बड़ा गुण होती है. इसी सवाल के इर्द-गिर्द ‘साली मोहब्बत’ की कहानी आगे बढ़ती है, जहां एक आम-सी दिखने वाली लड़की अपने दिमाग, धैर्य और हालात की समझ से खुद को बचाने के लिए हर हद पार करने को तैयार दिखती है, यहां तक कि जरूरत पड़ने पर वह कानून को भी चकमा दे देती है. जानी-मानी अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा की यह फिल्म उनके निर्देशन की दूसरी पेशकश है, जो शुरुआत से ही दर्शक को बांधकर रखती है.
कहानी की मुख्य किरदार स्मिता है, जिसका किरदार राधिका आप्टे ने निभाया है. स्मिता एक बॉटनी ग्रेजुएट है, जिसे पेड़-पौधों से प्यार है और जो एक शांत, घरेलू और अपने पति की देखभाल करने वाली हाउसवाइफ के रूप में दिखाई देती है. वह अपने शराबी पति पंकज और उसके कर्ज के दबाव में घुटती हुई जिंदगी जी रही होती है. कहानी तब करवट लेती है, जब उसकी मौसेरी बहन शालिनी घर आती है और स्मिता अपने ही पति को शालिनी के साथ रंगे हाथों पकड़ लेती है. इसके बाद धोखे, डर और टूटे भरोसे के बीच स्मिता जो फैसला लेती है, वह पूरी कहानी को झकझोर कर रख देता है.
निर्देशक टिस्का चोपड़ा फिल्म की शुरुआत से ही थ्रिल और सस्पेंस का माहौल तैयार कर देती हैं. अपनी शॉर्ट फिल्म ‘चटनी’ की तरह यहां भी पेड़-पौधे सिर्फ प्रतीक नहीं, बल्कि कहानी के ट्विस्ट और टर्न का अहम हिस्सा बनते हैं. बाहर से बेहद सरल दिखने वाली कहानी धीरे-धीरे जटिल होती जाती है. फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा जरूर है, लेकिन दूसरा हाफ तेज, गहरा और ज्यादा प्रभावशाली बनकर सामने आता है. बेवफाई, लालच, नैतिकता और प्यार की सीमाओं जैसे विषयों को टिस्का ने थ्रिलर के अंदाज में बखूबी पिरोया है. कहानी भले कुछ जगह अनुमानित लगे, लेकिन उसका एग्जिक्यूशन दर्शकों की पकड़ बनाए रखता है. करण कुलकर्णी का बैकग्राउंड स्कोर तनाव को लगातार बढ़ाता है और विदुषी तिवारी की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को विजुअली मजबूत बनाती है.
अभिनय की बात करें तो राधिका आप्टे एक बार फिर साबित करती हैं कि वह कॉम्प्लेक्स किरदारों में जान डालने में माहिर हैं. स्मिता के रूप में उनका अभिनय दमदार और यादगार है. करप्ट और चालाक पुलिस अफसर रतन पंडित के रोल में दिव्येंदु खूब जमे हैं. अंशुमान पुष्कर ने शराबी और बेवफा पति के किरदार को सच्चाई के साथ निभाया है. गैंगस्टर के रोल में अनुराग कश्यप प्रभाव छोड़ते हैं, वहीं शालिनी के किरदार में सौरसैनी मित्रा सहज लगती हैं. शरद सक्सेना भले ही छोटी भूमिका में हों, लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाते हैं.
अगर आप मर्डर मिस्ट्री, थ्रिलर और सस्पेंस से भरपूर कहानियों के शौकीन हैं और मजबूत अभिनय के साथ अलग अंदाज की फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘साली मोहब्बत’ आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प साबित हो सकती है.

