गाजियाबाद की एक हाईराइज सोसाइटी से तीन सगी बहनों के कूदकर आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है, जांच में सामने आया है कि कुछ खतरनाक मोबाइल गेम्स ने बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला और इस दर्दनाक घटना में अहम भूमिका निभाई, इसी को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर इन मोबाइल गेम्स पर तुरंत बैन लगाने की मांग की है, पुलिस का कहना है कि ऐसे गेम्स बच्चों की सुरक्षा और मानसिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
डीसीपी निमिष पाटिल के अनुसार बच्चियों के सुसाइड नोट में पांच मोबाइल गेमिंग ऐप्स का जिक्र मिला है, जिनका उन पर नकारात्मक मानसिक प्रभाव पड़ रहा था, पुलिस ने राज्य सरकार से इन ऐप्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है और यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजे जाने की तैयारी है, ताकि देशभर में बच्चों को ऐसे खतरनाक कंटेंट से बचाया जा सके।
जांच में सामने आए गेम्स में पॉपी प्लेटाइम, द बेबी इन यलो, ईविल नन, आइस क्रीम मैन और आइस गेम जैसे नाम शामिल बताए गए हैं, पुलिस का कहना है कि बच्चों को निशाना बनाकर बनाए गए ऐसे डरावने और हिंसक गेम्स उनके मन पर गहरा असर डालते हैं और लंबे समय तक खेलने से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि तीनों बहनें कोरियाई पॉप कल्चर और के-ड्रामा की लत में डूबी हुई थीं और घंटों मोबाइल पर वीडियो देखती रहती थीं, परिवार के मुताबिक पिछले तीन साल से उन्होंने स्कूल जाना भी छोड़ दिया था और उनकी दुनिया मोबाइल और ऑनलाइन कंटेंट तक सिमट कर रह गई थी, जो धीरे-धीरे उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता चला गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए यूपी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और जिलाधिकारियों को यह निर्देश देने की बात कही है कि कक्षा पांच तक के बच्चों को मोबाइल फोन पर प्रोजेक्ट और असाइनमेंट भेजने की व्यवस्था पर रोक लगाई जाए, ताकि कम उम्र में बच्चों की मोबाइल निर्भरता कम हो और वे वास्तविक दुनिया से जुड़े रह सकें।
पूरे मामले की बात करें तो 4 फरवरी की रात करीब दो बजे गाजियाबाद की एक हाईराइज बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से तीन सगी बहनों ने छलांग लगाकर अपनी जान दे दी, पुलिस अब तक की जांच में किसी बाहरी साजिश के संकेत नहीं पाती और इसे आत्महत्या का मामला मानकर डिजिटल ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है कि किन ऐप्स और कंटेंट ने बच्चियों को मानसिक रूप से प्रभावित किया था।

