आज 11 जनवरी है, वही दिन जब करीब एक हजार साल पहले पहली बार विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। हजारों साल पुराना सोमनाथ मंदिर इतिहास, आस्था और संघर्ष का जीवंत प्रतीक रहा है। सदियों में इसे बार-बार मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार यह मंदिर टूटकर भी और अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ। मान्यता है कि सोमनाथ मंदिर को लगभग 17 बार लूटा और तोड़ा गया। महमूद गजनवी ने भी इस पवित्र धाम पर कई बार आक्रमण किए और मंदिर के चंदन द्वार लूटकर गजनी ले जाकर मस्जिद में लगवा दिए। आजादी के बाद 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से वे चंदन द्वार भारत वापस लाए गए और पुनः सोमनाथ में स्थापित किए गए।
इसी ऐतिहासिक दिन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और प्रेरक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि श्री सोमनाथ मंदिर भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का जीवंत प्रतीक है और पिछले एक हजार वर्षों का इतिहास इस बात का साक्षी है कि विदेशी आक्रांताओं की घृणा, कट्टरता और विध्वंस की नीति के सामने भारत की आस्था, साहस और सृजनशीलता कभी नहीं झुकी।
सीएम योगी ने आगे कहा कि आज बाबा सोमनाथ का जो भव्य और दिव्य स्वरूप देश और दुनिया देख रही है, वह सरदार वल्लभभाई पटेल की निष्ठा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अटूट आस्था, के.एम. मुंशी की जिजीविषा और लाखों सनातन धर्मावलंबियों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में सनातन आस्था के सांस्कृतिक गौरव का उत्सव मना रहा है, जहां गजनी जैसे आतताइयों के धूलधूसरित विध्वंस पर उल्लास, सृजन और वैभव का नया अंकुर फूट रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि यह पर्व इस सत्य का प्रतीक है कि सत्य को कभी पराजित नहीं किया जा सकता और गौरवशाली सनातन संस्कृति का उत्थान और अभिवर्धन सदैव होता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण के इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया।

