यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के 2026 के नए रेगुलेशन को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। सामान्य वर्ग के लोग सड़कों पर उतर आए हैं और इसे अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं। सवर्ण समाज में इस बिल को लेकर भारी आक्रोश है, वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सवर्ण समाज की ओर से बच्चों को इच्छा मृत्यु देने जैसी तीखी मांग तक सामने आ गई है।
भोपाल में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज एमपी के अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा कि पहले कहा गया बटोगे तो कटोगे और अब खुद ही समाज को बांटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज में खाई पैदा कर रही है और अगर यही रवैया है तो सरकार सवर्ण समाज के बच्चों को इच्छा मृत्यु दे दे। उन्होंने भारत बंद की मांग करते हुए कहा कि सवर्ण समाज इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वर्ण व्यवस्था की कोई आवश्यकता नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का मूल अर्थ है हम सब एक हैं और सब का मालिक एक है। वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं बल्कि कर्म से जुड़ी थी, जो समय के साथ विकृत होकर जन्म आधारित हो गई। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर सकता है कि वर्ण व्यवस्था जन्म से थी तो वे प्रमाण दें। उनके मुताबिक आज के दौर में कोई भी किसी भी क्षेत्र में काम कर रहा है और ऐसे में वर्ण व्यवस्था की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है।
वहीं बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनता से जुड़े फैसले संसद में चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं। बीजेपी प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि संसद में जनप्रतिनिधि बैठते हैं और विस्तृत चर्चा के बाद ही निर्णय होते हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को भी यह बात याद रखनी चाहिए।
कांग्रेस ने UGC बिल को साजिश करार दिया है। कांग्रेस प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ने कहा कि यह बिल छात्रों के बीच फूट डालने का काम करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है और यह पूरा मामला पहले से रचा गया षड्यंत्र है। उनका कहना है कि Gen Z सरकार के खिलाफ आवाज उठा रही है और छात्रों की इस आवाज को दबाने के लिए जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है।
NSUI ने भी इस मुद्दे पर प्रदेशभर में अभियान चलाने का ऐलान किया है। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि केंद्र सरकार जातियों में बांटने का काम कर रही है, जो बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी अब आरएसएस और बीजेपी का एक और संस्थान बन गया है और इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
UGC के विरोध में सपाक्स और अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सपाक्स के वरिष्ठ नेता उमाशंकर तिवारी ने कहा कि सरकार सामान्य वर्ग की कमर तोड़ना चाहती है और यह पूरी तरह से केंद्र सरकार का षड्यंत्र है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं और यह वर्ग संघर्ष को जन्म देगा।
इंदौर में करणी सेना ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के नालंदा परिसर में प्रदर्शन करते हुए UGC का पुतला फूंका। करणी सेना ने इन नियमों को काला कानून बताते हुए वापस लेने की मांग की और कहा कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव बढ़ेगा। संगठन ने 1 फरवरी को भारत बंद और 2 फरवरी को सांसद निवास घेराव की चेतावनी दी है।
जबलपुर में प्रगतिशील ब्राह्मण महिला संगठन ने भी UGC के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस काले कानून से सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाएगा।
रायसेन में सकल हिंदू समाज ने खुद को जंजीरों में बांधकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए UGC 2026 के नियमों को संविधान और शैक्षणिक स्वायत्तता के खिलाफ बताया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई तो 23 मार्च को देशव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

