उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन आज विरोध की आग में जलती नजर आई, जहां केंद्र सरकार के हालिया नीतिगत फैसलों और विश्वविद्यालयों में लागू होने वाले नए UGC नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
टावर चौक से शहीद पार्क तक निकाले गए मशाल और मोबाइल लाइट मार्च में छात्र, पुजारी और समाजसेवी एक स्वर में अपने आक्रोश का इजहार करते दिखाई दिए।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने मंच से तीखे शब्दों में कहा कि देश में आरक्षण केवल 10 वर्षों के लिए लागू किया गया था, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए इसे लगातार बढ़ाया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस देश में केवल एक ही वर्ग पर अत्याचार हुआ है, जबकि ब्राह्मण, राजपूत और अन्य सवर्ण समाज ने हमेशा सेवा और संरक्षण का ही काम किया है।
उन्होंने कहा कि आज 90 प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चे भटक रहे हैं और 33 प्रतिशत अंक वालों को आगे बढ़ाया जा रहा है, अगर अब भी समाज नहीं जागा तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
प्रदर्शन में शामिल छात्र आश्विन रघुवंशी ने सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरी फीस भरता है, उसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती, लेकिन नौकरी के समय उसे सबसे पीछे खड़ा कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि UGC के नए नियमों के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों को उत्पीड़क के रूप में दिखाया जा रहा है, जबकि 25 प्रतिशत सवर्ण छात्र 75 प्रतिशत बहुमत पर कैसे अत्याचार कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालयों की दीवारों पर लिखे ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ और ‘ठाकुर छोड़ो’ जैसे नारों को समाज के अस्तित्व पर सीधा हमला बताया।
वहीं समाजसेवी सुरेंद्र चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह आंदोलन का पहला चरण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी कर समाज में जातिगत विद्वेष फैला रही है और जो बच्चे सालों से साथ पढ़ते आए थे, उनके बीच इस काले कानून ने नफरत का बीज बो दिया है।
उन्होंने मांग की कि सरकार इस भेदभावपूर्ण कानून को तुरंत वापस ले, नहीं तो यह चिंगारी जल्द ही पूरे देश में दावानल बन जाएगी।

