भोपाल। मध्य प्रदेश में वेयरहाउसिंग सिस्टम पूरी तरह चरमरा चुका है। करीब 7000 निजी वेयरहाउस संचालक किराया न मिलने से परेशान हैं, और एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान महीनों नहीं… बल्कि सालों से अटका हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि कई वेयरहाउस मालिक कर्ज में डूब चुके हैं और बैंक उनके गोदामों को एनपीए घोषित कर रहे हैं। वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन पिछले तीन साल से भुगतान नहीं कर रहा, मार्कफेड, नैफेड और एनसीसीएफ से राशि नहीं आई, और नतीजा—8600 वेयरहाउसों में से 7000 लगभग बंद होने की कगार पर पहुँच गए। हजारों गोदामों पर ताले लटक गए और सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सामने आए और सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश का वेयरहाउसिंग सिस्टम बर्बाद हो चुका है, 81% वेयरहाउस खाली पड़े हैं, मालिक तीन-तीन साल से किराए के इंतजार में हैं, करोड़ों रुपये फंस चुके हैं और बैंक उन्हें एनपीए घोषित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही, भुगतान रोकने और कुप्रबंधन का नतीजा है।
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार ने मार्कफेड, सिविल सप्लाई निगम और नेफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्राइवेट वेयरहाउस तो ले लिए, लेकिन बाद में किराया और भुगतान रोक दिया। हजारों निवेशकों ने सरकार पर भरोसा करके जमीन गिरवी रखकर करोड़ों के गोदाम बनाए, कर्ज लिया, और अब हाल ये है कि तीन साल से एक रुपया तक नहीं मिला। कई मालिक अपने घर, खेत, गहने बेचकर EMI भर रहे हैं—फिर भी कर्ज बढ़ता जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक वेयरहाउस मालिक को अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि पांच साल तक लगातार भंडारण मिलेगा, लेकिन अब तीन साल से कोई भुगतान नहीं आया और बैंक नीलामी का नोटिस भेज रहा है। दूसरा मालिक बताता है कि उसका आधा गोदाम वैसे ही खाली पड़ा है, और जो भरा है उसका भी किराया महीनों से नहीं मिला। उसका पूरा व्यवसाय ठप हो गया है और सरकार कोई समाधान बताने को तैयार नहीं।
आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। मध्यप्रदेश में कुल 4.20 करोड़ मीट्रिक टन क्षमता वाले वेयरहाउस हैं, लेकिन सरकार ने सिर्फ 79.57 लाख मीट्रिक टन का ही उपयोग किया। यानी क्षमता पड़ी है करोड़ों मीट्रिक टन, लेकिन गोदाम खाली हैं और निवेशक बर्बाद। प्याज भंडारण का पैसा भी अटका हुआ है, और हजार करोड़ रुपए के भुगतान पर सरकार ने ताला लगा दिया है। जब देश में भंडारण की जरूरत बढ़ रही है, तब मध्यप्रदेश में हजारों वेयरहाउस बंद पड़े हैं—ये सिर्फ कुशासन नहीं, ये एक आर्थिक दुर्घटना है जिसे कमलनाथ आर्थिक हत्या करार दे रहे हैं।
कमलनाथ ने सरकार से सीधे सवाल उठाए—हजारों करोड़ का भुगतान आखिर रोका क्यों गया? वेयरहाउस खाली क्यों रखे गए? ये फैसला किसने और किसके लिए लिया? और उन हजारों परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा जो सरकार पर भरोसा करके आज कर्ज में डूब चुके हैं? उन्होंने कहा कि सरकार मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बना रही है और सिर्फ तमाशा देख रही है, जबकि किसानों, व्यापारियों और वेयरहाउस मालिकों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो चुकी है। जनता अब जवाब मांग रही है और सरकार को जवाब देना ही होगा।

