गुना। मध्य प्रदेश के गुना से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर ऐसा देखने को मिल रहा है कि “सिलेक्टेड” यानी नियुक्त अधिकारी “इलेक्टेड” यानी चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर हावी हो रहे हैं। विधायक का कहना है कि इस स्थिति का सीधा असर जनहित के कामों और विकास की गति पर पड़ रहा है।
उन्होंने अपनी बात को समझाने के लिए तंज भरे अंदाज में कहा कि “हम मंदिर में खड़े हैं और हमें प्रसाद ही नहीं मिल रहा।” उनके इस बयान का मतलब यह बताया जा रहा है कि जनप्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाने के बावजूद कई बार फैसलों और कामों में उनकी भूमिका कमजोर कर दी जाती है। हालांकि मंदिर और प्रसाद वाली उनकी यह टिप्पणी सुनकर मीडिया कर्मी भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गए कि आखिर इसका असली आशय क्या है।
दरअसल शनिवार को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुना पहुंचे थे, जहां उन्होंने राज्य के बजट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मंत्री ने बजट को युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए समावेशी बताते हुए सरकार की योजनाओं पर चर्चा की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इलेक्टेड प्रतिनिधियों की भूमिका सर्वोपरि होती है। उन्होंने जिले की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को उचित महत्व नहीं मिलता तो विकास कार्यों की गति भी प्रभावित होती है।
इसी दौरान जब उनसे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब देकर इस सवाल को टाल दिया और बातचीत को स्थानीय मुद्दों तक ही सीमित रखा।

