शादी का झांसा देकर 5 साल तक शोषण, धर्म परिवर्तन का दबाव और बेरहमी से पिटाई, महिला ने यश चौहान उर्फ याशीन पर लगाए सनसनीखेज आरोप

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में पहचान छुपाकर प्रेम संबंध बनाने, शादी का झांसा देने, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और बेरहमी से मारपीट करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने आरोपी यश चौहान उर्फ मोहम्मद याशीन मेमन के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता के मुताबिक साल 2020 में वह पाटनीपुरा में एक कॉस्मेटिक दुकान पर काम करती थी और रोज सीटी वैन से आना-जाना करती थी, इसी दौरान वैन ड्राइवर ने खुद को यश चौहान बताकर उससे नजदीकी बढ़ाई और दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई।

आरोपी ने बहाने से उसे विराट नगर मुसाखेड़ी स्थित किराए के मकान में ले जाकर शादी का वादा किया और शारीरिक संबंध बनाए।

कुछ समय बाद जब महिला गर्भवती हुई तो आरोपी ने फिर शादी का भरोसा दिलाया और उसे कन्नौद के अंबाड़ा इलाके ले गया, जहां सच्चाई सामने आई कि जिसका नाम यश बताया गया था वह असल में मोहम्मद याशीन निकला।

महिला ने शादी से इनकार किया तो आरोपी ने उसे और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को जान से मारने की धमकी दी, डर और दबाव में वह उसके साथ रहने को मजबूर होती रही।

3 अप्रैल 2021 को महिला ने बेटे को जन्म दिया और इसके बाद आरोपी ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, मना करने पर उसके साथ मारपीट होने लगी और प्रताड़ना बढ़ती चली गई।

हालात इतने खराब हो गए कि अक्टूबर 2025 में वह बेटे को लेकर अलग रहने लगी, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंचकर धमकाने और परेशान करने से बाज नहीं आया।

19 जनवरी 2026 को आरोपी ने महिला के साथ फिर बेरहमी से मारपीट की, उसका सिर दीवार में दे मारा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई, इसके बाद आरोपी उसे और बच्चे को रिश्तेदार के घर छोड़कर फरार हो गया।

घायल महिला को इलाज के लिए महाराजा यशवंतराव अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब दस दिन तक उसका इलाज चला और ठीक होने के बाद उसने हिम्मत जुटाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 64, 64(2)(एम) और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश जारी है।

यह मामला सिर्फ धोखे से बनाए गए रिश्ते का नहीं बल्कि पहचान छुपाकर शोषण, जबरन दबाव और हिंसा का है, अब देखना यह है कि कानून आरोपी तक कब पहुंचता है और पीड़िता को कब इंसाफ मिलता है।

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