उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सबसे बड़ा माध्यम हैं। वर्ष 2017 से पहले इन परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद व्यवस्था में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला। भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और पूरी तरह मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि योग्य उम्मीदवार बिना किसी सिफारिश और खर्ची-पर्ची के नौकरी हासिल कर सकें। इस बदलाव ने न सिर्फ युवाओं के सपनों को नई दिशा दी है, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत बनाया है।
2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश भर्ती घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं के लिए बदनाम रहा। इस दौर में कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में घिरी रहीं। वर्ष 2014 में यूपी-सीपीएमटी परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जिसमें प्रश्नपत्रों के सीलबंद बॉक्स से छेड़छाड़ सामने आई और परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। वर्ष 2015 में यूपीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर व्हाट्सएप पर लीक हुआ, जिसके बाद परीक्षा निरस्त करनी पड़ी और छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य चयन प्रक्रियाओं में भी धांधली, मेरिट में हेरफेर और पक्षपात के आरोप लगे, जिससे भर्तियां वर्षों तक अटकी रहीं और युवाओं का भरोसा पूरी तरह टूट गया।
योगी सरकार ने सत्ता में आते ही प्रतियोगी परीक्षाओं में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सख्त प्रहार किया। पेपर लीक, नकल माफिया और सॉल्वर गैंग पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई। दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तक लगाने के निर्देश दिए गए और लापरवाह एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाएं भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार से मुक्त होने लगीं और युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हुआ।
सरकार ने तकनीकी और कानूनी सुधारों को भी मजबूती से लागू किया। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली, डिजिटल मॉनिटरिंग और सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य बनाया गया। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स अध्यादेश लाकर पेपर लीक जैसे अपराधों पर आजीवन कारावास और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया। बीते आठ वर्षों में 8 लाख 50 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां पूरी पारदर्शिता के साथ दी गईं, जिनमें पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभाग शामिल हैं, जो सरकार की प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दर्शाता है।
हाल ही में योगी सरकार ने पुलिस भर्ती में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए 32 हजार 679 पदों की भर्ती में सभी वर्गों के लिए एक बार तीन वर्ष की आयु सीमा में छूट देने का फैसला किया। इससे उन लाखों युवाओं को फायदा मिलेगा, जो पूर्व में भर्तियों में देरी के कारण आयु सीमा पार कर चुके थे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया यह निर्णय सरकार की संवेदनशीलता और युवाओं के प्रति सकारात्मक सोच को दर्शाता है, जिससे पुलिस बल और अधिक मजबूत होगा।
योगी सरकार की इन पहलों से साफ है कि अब प्रतियोगी परीक्षाएं सिर्फ योग्यता की कसौटी बन चुकी हैं। जहां पहले भर्तियां सालों तक अटकी रहती थीं, वहीं अब समयबद्ध और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना जैसी पहल के जरिए मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। पारदर्शिता, मेरिट और युवा हित को सर्वोपरि रखकर उठाए गए कदम उत्तर प्रदेश को देश के लिए एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं और युवाओं में यह भरोसा जगा रहे हैं कि मेहनत का फल अब जरूर मिलेगा।

