बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
मोकामा के बाहुबली और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब राजनीतिक बयानबाज़ी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
पटना पुलिस ने उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में देर रात गिरफ्तार किया है।
दुलारचंद के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अनंत सिंह के समर्थकों ने पहले फायरिंग की, फिर गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी साफ़ तौर पर ये बात सामने आई है कि मौत कुचलने से हुई थी।
मामले में कुल पाँच लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
अब इस गिरफ्तारी पर सियासी पारा चढ़ चुका है —
सपा नेता आईपी सिंह ने ट्वीट कर तंज कसा और कहा —
“बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते… हत्या के बाद चार दिन तक प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रैलियां करते रहे, उन्हें होश ही नहीं रहा कि उनके MLA ने हत्या कराई है।
आज मोदी जी को बिहार में रैली करनी है, सोशल मीडिया में यह मुद्दा गरम है, इसलिए पीएम के आने से पहले ही गिरफ्तारी का कोरम पूरा किया गया।”
यानी आईपी सिंह ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में उठाया गया कदम बताया।
वहीं, बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने पूरी तरह अलग रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि बिहार में कानून का राज है, और पुलिस ने जो कार्रवाई की है, वो कानून के दायरे में है।
“कानून अपना काम कर रहा है, और अब अदालत सबकुछ देखेगी,” — दिलीप जायसवाल ने कहा।
इसी बीच, जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी — जो खुद इस सीट से चुनाव मैदान में हैं —
उन्होंने अनंत सिंह की गिरफ्तारी को “स्वागत योग्य कदम” बताया।
लेकिन साथ ही उन्होंने पुलिस पर सवाल भी उठाए और कहा —
“काश ये कार्रवाई पहले हुई होती। जब एफआईआर दर्ज हुई थी, तब ही गिरफ्तारी हो जानी चाहिए थी।
आज भी वे 50 गाड़ियों के काफिले के साथ प्रचार कर रहे थे। खैर, देर आए दुरुस्त आए,
अब जरूरी है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करे ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।”
अब मोकामा की फिज़ा पूरी तरह गर्म हो चुकी है।
एक तरफ अनंत सिंह की गिरफ्तारी, दूसरी ओर नेताओं की बयानबाज़ी —
ऐसे में सवाल बड़ा है कि क्या इस घटनाक्रम का असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा,
या फिर मोकामा की जनता इस बार अपने फैसले से सबको चौंका देगी?

