नर्मदापुरम। न्याय व्यवस्था ने एक बार फिर सख्त संदेश देते हुए मानवता को शर्मसार करने वाले अपराध पर कड़ा रुख अपनाया है। सामूहिक दुष्कर्म के बाद एक महिला की निर्मम हत्या के मामले में कोर्ट ने तीनों दोषियों को जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। यह हृदयविदारक घटना तब सामने आई थी जब आरोपियों ने शराब के नशे में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और पहचान छिपाने तथा पकड़े जाने के डर से उसकी गर्दन तोड़कर हत्या कर दी।
मामला पिपरिया थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने साक्ष्यों और चश्मदीद गवाहों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार ने इस अपराध को क्रूरतम और अमानवीय बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल सामान्य उम्रकैद पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषियों को तब तक सलाखों के पीछे रहना होगा जब तक उनकी अंतिम सांस न निकल जाए।
अपर लोक अभियोजक सतेंद्र पटेल के अनुसार धारा 376D के तहत गैंगरेप और हत्या के मामले में अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए और करीब 51 दस्तावेजों को प्रमाणित कराया। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसे न्याय व्यवस्था की सख्ती और संवेदनशीलता का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।

