उज्जैन। धार्मिक नगरी Ujjain में सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल की शुरुआत होते ही अधिकांश वैष्णव मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। कई मंदिरों के मुख्य द्वार पर ताले लगा दिए गए और मूर्तियों को कपड़े से ढंक दिया गया। शहर के छोटे-बड़े मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा और श्रद्धालुओं को ग्रहण समाप्त होने तक इंतजार करने की सलाह दी गई।
चंद्रग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर लगा, लेकिन सूतक काल सुबह से ही प्रभावी हो गया था। नियमों के अनुसार सूतक के दौरान देवी-देवताओं के पूजन पर प्रतिबंध रहता है, इसलिए मंदिरों के कपाट बंद रखे गए। Mangalnath Temple, Sandipani Ashram और Angareshwar Mahadev Temple समेत कई प्रमुख मंदिरों में दर्शन व्यवस्था स्थगित रही।
मंदिरों के पुजारियों के अनुसार सूतक काल में पूजन-अर्चना का विधान नहीं है और भोग अर्पित करने पर भी रोक रहती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाएगी, फिर विधि-विधान से पूजा और आरती शुरू होगी।
लेकिन इन सबके बीच एक मंदिर ऐसा रहा जहां श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का क्रम नहीं रुका। विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Temple में बाबा महाकाल के दर्शन जारी रहे। यहां केवल भोग पर प्रतिबंध लगाया गया और भगवान के स्पर्श पर रोक रखी गई। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि महाकाल प्रधान देवता हैं, कालों के काल हैं, इसलिए उन पर किसी भी ग्रहण या सूतक का प्रभाव नहीं पड़ता।
यही वजह है कि चाहे सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, महाकाल मंदिर में आरती और दर्शन की परंपरा बनी रहती है। आस्था और परंपरा का यह अनोखा संगम एक बार फिर उज्जैन में देखने को मिला, जहां बाकी मंदिरों के पट बंद रहे, लेकिन महाकाल के दरबार में श्रद्धा की ज्योति जलती रही।

