यमुना एक्सप्रेस-वे बन रहा बहुक्षेत्रीय औद्योगिक कॉरिडोर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। योगी सरकार के कार्यकाल में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा द्वारा विकसित औद्योगिक सिटीज अब पारंपरिक औद्योगिक प्लॉटिंग से आगे बढ़कर एक संगठित सेक्टर आधारित आर्थिक ढांचे के रूप में सामने आ रही हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, टॉय सिटी और अपैरल पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ प्रस्तावित फिल्म सिटी, फिनटेक सिटी और विदेशी साझेदारी पर आधारित थीम सिटीज मिलकर यमुना एक्सप्रेस-वे को एक बहुक्षेत्रीय औद्योगिक कॉरिडोर में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उच्च मूल्य उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा

यमुना एक्सप्रेस-वे के सेक्टर-28 में करीब 350 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किया जा रहा है, जबकि सेक्टर-24 में लगभग 200 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तैयार हो रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है। इसके अलावा सेक्टर-33 में करीब 100 एकड़ में टॉय सिटी और सेक्टर-29 में लगभग 175 एकड़ का अपैरल पार्क स्थापित किया जा रहा है, जो श्रम आधारित उद्योगों को एक संगठित ढांचा प्रदान करेंगे। इन सभी परियोजनाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी सप्लाई चेन एक ही कॉरिडोर के भीतर विकसित हो सके।

फिल्म सिटी और फिनटेक सिटी से मिलेगा नया आयाम

यमुना एक्सप्रेस-वे के सेक्टर-21 में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित फिल्म सिटी को केवल मनोरंजन परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसे मीडिया, कंटेंट प्रोडक्शन, पोस्ट प्रोडक्शन और डिजिटल सेवाओं के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही सेक्टर-11 में करीब 500 एकड़ में प्रस्तावित फिनटेक सिटी मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का काम करेगी। इससे उद्योगों को भुगतान, निवेश और वैश्विक लेनदेन के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलने की संभावना है।

विदेशी सहयोग से बनेंगी विशेष थीम सिटीज

अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-4 में कोरियन सिटी और सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी के लिए करीब 500-500 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल विदेशी निवेश आकर्षित करना नहीं है बल्कि संबंधित देशों की तकनीक, प्रबंधन प्रणाली और औद्योगिक कार्य संस्कृति को स्थानीय ढांचे में शामिल करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सिटीज में बड़ी एंकर कंपनियां स्थापित होती हैं तो इससे आसपास के क्षेत्रों में सहायक उद्योगों और सेवा क्षेत्र को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा।

लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई को मिलेगा बड़ा सहारा

टप्पल क्षेत्र में करीब 200 एकड़ में प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स पार्क इस पूरे औद्योगिक ढांचे की आपूर्ति और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा सेक्टर-29 में 200 एकड़ का एमएसएमई पार्क छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़े उद्योगों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। इससे स्थानीय उद्यमियों को उत्पादन श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यमुना एक्सप्रेस-वे के आसपास विकसित हो रही इन औद्योगिक सिटीज का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आवासीय टाउनशिप, स्किल डेवलपमेंट संस्थान और सहायक सेवाओं के विस्तार के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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