रायसेन। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध मां जानकी के करीला धाम की तरह ही रायसेन जिले में भी एक आस्था का केंद्र है, जिसे मिनी करीला धाम भानपुर के नाम से जाना जाता है। हर साल रंग पंचमी के मौके पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं।
बताया जाता है कि जो श्रद्धालु अशोकनगर के करीला धाम तक नहीं पहुंच पाते, वे रायसेन जिले के गैरतगंज के भानपुर स्थित इस मिनी करीला धाम में आकर मां जानकी से अपनी मुराद मांगते हैं। यहां पहाड़ी पर प्रकट स्वरूप में मां जानकी की पूजा की जाती है और भक्तों का विश्वास है कि मां यहां भी उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।
करीब 25 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत जो भक्त करीला धाम नहीं जा पाते, वे भानपुर के इस मिनी करीला धाम में आकर मां जानकी के दरबार में नृत्य कर अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी जाहिर करते हैं। यहां लगने वाला मेला रंग पंचमी के एक दिन पहले से शुरू होकर रंग पंचमी की रात तक चलता है और इस दौरान करीब 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मान्यता है कि मां जानकी ने एक पांडा को स्वप्न में दर्शन देकर कहा था कि जो भक्त करीला धाम तक नहीं पहुंच पाएंगे, उनकी मुराद वह भानपुर में भी पूरी करेंगी। तभी से यहां आस्था का यह केंद्र विकसित हो गया और पिछले करीब 20 वर्षों से लोग यहां संतान, धन-संपत्ति और यश की कामना लेकर आते हैं।
मन्नत पूरी होने पर भक्त मां जानकी के दरबार में बेड़नी से नृत्य कराते हैं और झंडा चढ़ाकर आभार प्रकट करते हैं। जिस बेड़नी को समाज अक्सर अलग नजर से देखता है, उसी के हाथों यहां मन्नत पूरी होने पर बधाई कराई जाती है, जो इस परंपरा की खास पहचान मानी जाती है।
करीला धाम की तरह यहां भी मां जानकी और लव-कुश की मूर्तियां स्थापित हैं। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं और हर साल हजारों लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। रंग पंचमी के मौके पर यह पूरा क्षेत्र भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर नजर आता है।

