लखनऊ. Swami Avimukteshwaranand ने एक धर्मसभा के दौरान फर्जी शंकराचार्यों के मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया है। Kanshiram Smriti Upvan के आशियाना क्षेत्र में आयोजित गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर एक कथित व्यक्ति को शंकराचार्य बनाकर उसे संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रदेश का मुख्यमंत्री सदन में यह कहते हैं कि हर कोई अपने आप को शंकराचार्य नहीं बना सकता, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को मंच और संरक्षण क्यों दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधोक्षजानंद नाम का व्यक्ति खुद को शंकराचार्य बताता है और उसे कुछ लोग समर्थन भी दे रहे हैं।
स्वामी ने इस दौरान एक पुराना किस्सा भी सुनाया, जो Kerala से जुड़ा बताया गया। उन्होंने कहा कि करीब 8 से 10 साल पहले केरल के तत्कालीन मुख्य सचिव का उन्हें फोन आया था। मुख्य सचिव ने उनसे पूछा था कि पुरी के असली शंकराचार्य कौन हैं। इस पर स्वामी ने बताया कि Nischalananda Saraswati ही पुरी पीठ के वास्तविक शंकराचार्य हैं।
इसके बाद मुख्य सचिव ने यह भी पूछा कि क्या अधोक्षजानंद पुरी पीठ के शंकराचार्य हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ तौर पर कहा कि ऐसा नहीं है। तब मुख्य सचिव ने बताया कि अधोक्षजानंद का प्रोटोकॉल उनके पास आया था और शंकराचार्य समझकर उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा देने की तैयारी की गई थी।
स्वामी के अनुसार मुख्य सचिव को तब शक हुआ जब रास्ते में अधोक्षजानंद ने एक ढाबे पर गाड़ी रुकवाकर खटिया पर बैठकर खाना मंगाया। उस व्यवहार को देखकर उन्हें संदेह हुआ कि शायद यह वास्तविक शंकराचार्य नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने दोबारा जांच करवाई और प्रमाण जुटाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि जब सारे प्रमाण सामने आए तो केरल प्रशासन ने अधोक्षजानंद को साफ कह दिया कि या तो वे तुरंत राज्य की सीमा छोड़ दें या फिर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद वह वहां से बाहर चले गए।
सभा में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हिंदू समाज भाग्यशाली है कि उसे Nischalananda Saraswati जैसे विद्वान शंकराचार्य मिले हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सनातन धर्म के सच्चे आचार्यों का सम्मान किया जाना चाहिए और समाज को फर्जी दावों से सावधान रहना चाहिए।

