भोपाल। ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच के दौरान बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक उप-निरीक्षक यानी एएसआई दिनेश शर्मा पर कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि मामले से जुड़े सबसे अहम साक्ष्यों में से एक मानी जा रही ‘लिगेचर बेल्ट’ को बरामद करने के बावजूद एएसआई दिनेश शर्मा ने उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत तुरंत मालखाने में जमा नहीं कराया। आरोप है कि वह इस महत्वपूर्ण सबूत को करीब दो दिनों तक अपने साथ लेकर घूमते रहे और बाद में उसे जमा किया गया।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब ट्विशा शर्मा के परिजनों ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिवार का आरोप था कि मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ लापरवाही बरती गई है और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। परिजनों के हंगामे और गंभीर आरोपों के बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एएसआई दिनेश शर्मा को लापरवाही का दोषी माना गया और उनके खिलाफ आर्थिक दंड की कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
उधर, इस पूरे मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। सीबीआई की फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली स्थित एम्स से दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा में नए संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई कुछ संदिग्धों और मामले से जुड़े अन्य लोगों से दोबारा पूछताछ कर सकती है।
ट्विशा शर्मा मौत मामला पहले से ही चर्चाओं में बना हुआ है और अब सबूतों को संभालने में कथित लापरवाही तथा सीबीआई की बढ़ती सक्रियता ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। सभी की नजरें अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और एम्स की रिपोर्ट के आधार पर सामने आने वाले संभावित खुलासों पर टिकी हुई हैं।

