कोल यार्ड के प्रदूषण से गांवों में हाहाकार, फसलें बर्बाद और लोगों में बढ़ रही दमा की शिकायत

सिंगरौली। Shahdol जिले के गजरा बहरा इलाके में स्थित कोल यार्ड से फैल रहे प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोल यार्ड संचालक न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव कर रहे हैं और न ही प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जा रही है। लगातार उड़ रही कोयले की धूल से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, जबकि आसपास के लोगों को खांसी, दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर उड़ती धूल के कारण आए दिन हादसे भी हो रहे हैं और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उनका कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग को तुरंत सख्त कदम उठाते हुए कोल यार्ड संचालक को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना चाहिए, क्योंकि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मामले को लेकर अधिकारियों का कहना है कि कोल यार्ड संचालक के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। हालांकि संचालक इस कार्रवाई के खिलाफ अदालत पहुंच गया है और मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसी कारण प्रशासन की ओर से फिलहाल आगे की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण जिला प्रशासन स्थानीय लोगों की परेशानी को नजरअंदाज कर रहा है। प्रदूषण के कारण कई लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और आदिवासी क्षेत्र होने की वजह से गरीब परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रदूषण विभाग और जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आक्रोशित ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे।

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