भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, खुद परिसर का निरीक्षण करेगी कोर्ट

इंदौर। मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक Bhojshala को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर सोमवार को Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। करीब डेढ़ घंटे तक चली बहस के दौरान अदालत ने कहा कि कोर्ट खुद 2 अप्रैल से पहले भोजशाला परिसर का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण करेगी। साथ ही इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल से लगातार की जाएगी।

दरअसल हाईकोर्ट ने पहले Archaeological Survey of India द्वारा कराए गए सर्वे की रिपोर्ट पर सभी पक्षों से दावे, आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। उसी के तहत हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष और अन्य प्रतिवादियों ने अपने-अपने जवाब अदालत में दाखिल किए थे, जिन पर आज विस्तृत बहस हुई। इससे पहले 23 फरवरी को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए सभी पक्षकारों को निर्देश दिया था कि वे रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी आपत्तियां और सुझाव अदालत में प्रस्तुत करें।

यह पूरा मामला उस आदेश से जुड़ा है जो 22 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने दिया था। अदालत ने भोजशाला परिसर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने करीब 100 दिनों तक लगातार सर्वे किया, जिसमें ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, खुदाई, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक अवशेषों का अध्ययन किया गया।

सर्वे के दौरान परिसर में मिले कुछ अवशेषों को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्या सामने आई है। हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वे में मंदिर से जुड़े प्रमाण मिले हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए रिपोर्ट की व्याख्या पर सवाल खड़े किए हैं। इसी वजह से हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को विस्तृत आपत्तियां और सुझाव देने का मौका दिया था।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 से लगातार होगी। इस केस पर धार जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि भोजशाला विवाद लंबे समय से धार्मिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है।

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