भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों की हालत एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां एक तरफ फसल खरीदी अब तक शुरू नहीं हो पाई है और दूसरी तरफ किसानों से कर्ज वसूली की तैयारी पूरी कर ली गई है, सोसाइटी से लिया गया कर्ज जमा करने की अंतिम तारीख सामने खड़ी है, ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फसल ही नहीं बिकी तो कर्ज आखिर कैसे चुकाया जाए
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कर्ज चुकाने की तारीख बढ़ाने की मांग की है और साफ चेतावनी दी है कि अगर समय सीमा नहीं बढ़ाई गई तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा
कुणाल चौधरी ने अपने पत्र में कहा है कि किसानों को 16 मार्च से फसल बेचने का मौका मिलना था लेकिन सरकार ने खरीदी की तारीख को बढ़ाकर 1 अप्रैल कर दिया, हालात ये हैं कि अभी तक कई किसानों के स्लॉट तक बुक नहीं हुए हैं, बारदाना भी समय पर नहीं पहुंचा है और खरीदी की तैयारी अधूरी पड़ी है, ऐसे में किसान अपनी फसल बेच ही नहीं पा रहे हैं तो कर्ज चुकाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जीरो प्रतिशत ब्याज का दावा सिर्फ एक दिखावा है, क्योंकि जब तक किसान को उसकी फसल का पैसा नहीं मिलता तब तक वह कर्ज कैसे लौटाएगा, बाजार में गेहूं की कीमत भी MSP से कम मिल रही है और किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने किसानों की आय बढ़ने की बात कही थी, कांग्रेस ने इन दावों को पूरी तरह जमीनी हकीकत से दूर बताया और कहा कि सोयाबीन के दाम घटे हैं, खाद और दवाइयों की कीमतें बढ़ी हैं और खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है
कांग्रेस ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर किसानों के कर्ज की तारीख नहीं बढ़ाई गई तो प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है या फिर किसानों को एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ेगा

