आगरा. उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार पर सरकारी स्कूलों में बच्चों को समय पर किताबें न देने के आरोप लग रहे हैं।
नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए करीब 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आगरा जिले के कई परिषदीय विद्यालयों में अब तक छात्रों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं, जबकि सरकार की ओर से शत-प्रतिशत पुस्तक वितरण का दावा किया जा रहा है।
जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच का अंतर अब खुलकर सामने आ रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में हजारों बच्चे अब भी किताबों के इंतजार में हैं, वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अधिकांश विषयों की किताबें छात्रों तक नहीं पहुंची हैं।
सरकार एक तरफ ‘स्कूल चलो अभियान’ के जरिए शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी जरूरत यानी किताबें ही समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर कर दिया है और अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल दावों तक सीमित सुशासन है या फिर जमीनी स्तर पर व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामी है।

