खंडवा। न्याय की उम्मीद लेकर जनसुनवाई में पहुंचे किसानों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब राहत मिलने के बजाय उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, यह मामला मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की छैगांवमाखन तहसील के ग्राम बरूड़ का है, जहां के दो किसान अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
किसान रामनारायण मौजीलाल और श्याम रामनारायण पिछले तीन साल से अपने खेत तक जाने वाले रास्ते को खुलवाने की मांग कर रहे थे, उनका कहना है कि रसूखदारों ने रजिस्ट्री में दर्ज पुराने रास्ते को बंद कर दिया, जिसकी वजह से उनकी 8 एकड़ सिंचित जमीन बंजर पड़ी है और उसमें एक दाना तक नहीं उग पा रहा है।
किसानों ने बताया कि वे तहसील और एसडीएम कोर्ट में मामला जीत चुके थे, लेकिन बाद में प्रशासनिक स्तर पर फैसला बदल दिया गया, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई और वे लगातार दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान जब किसानों ने अपनी बात जोरदार तरीके से रखी और अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाया, तो प्रशासन ने इसे अभद्र व्यवहार मानते हुए कार्रवाई कर दी, सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने दोनों किसानों को धारा 151 और 170 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
प्रशासन का कहना है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और जनसुनवाई में इसका समाधान संभव नहीं है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एक किसान अपने ही खेत तक पहुंचने के लिए न्याय कहां मांगे और क्या अपनी बात रखने पर उसे जेल भेजना ही समाधान है।

