“बरनाश्रम निज-निज धरम निरत बेद पथ लोग… चलहिं सदा पावहिं सुखहि, नहि भय शोक न रोग…” रामचरितमानस की यह चौपाई बताती है कि जब समाज का हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करता है, तब सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है। कुछ इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश की मोहन सरकार अब विकास को नई दिशा देने की तैयारी में जुटी दिखाई दे रही है।
राज्य सरकार की ओर से 45 महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित विशेष बैठक को केवल एक प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस बार फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि काम हुआ या नहीं, बल्कि इस पर है कि काम कब तक और किस तरीके से पूरा होगा।
सरकार की इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर विभाग को अपनी प्रगति रिपोर्ट के साथ भविष्य की स्पष्ट कार्ययोजना भी पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं को जमीन पर उतारने की रफ्तार तेज होगी।
इन 45 मुद्दों में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, जल संकट, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और तकनीकी विकास जैसे कई अहम विषय शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क जमीन रजिस्ट्री और स्वामित्व योजना के विस्तार को सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। खास तौर पर महिलाओं के नाम पर संपत्ति रजिस्ट्री को बढ़ावा देना उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश है।
प्रदेश में बढ़ते पेयजल संकट को लेकर भी सरकार गंभीर नजर आ रही है। ग्राम पंचायत से लेकर शहरों तक जल प्रबंधन की एकीकृत नीति पर काम करने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में पानी की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।
महिलाओं के लिए चलाई जा रही लाड़ली बहना योजना को अब सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे रोजगार, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं से भी जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण का सबसे बड़ा आधार है।
युवाओं के लिए अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में आरक्षण देने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसे रोजगार और राष्ट्र निर्माण दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं आईटी सेक्टर, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट जैसे प्रस्ताव साफ संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक विकास के साथ आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। अलग-अलग विभागों के स्कूलों को एकीकृत कर शिक्षा विभाग के अधीन लाने और कैंसर अस्पताल, IVF सेंटर व मेडिकल यूनिवर्सिटी के विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है।
सरकार की इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है समय-सीमा और लगातार निगरानी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री खुद इन सभी विषयों की समीक्षा करेंगे ताकि प्रशासनिक ढिलाई की गुंजाइश कम हो सके।
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। इतने बड़े स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन, विभागों के बीच तालमेल, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
लेकिन अगर ये फैसले सही दिशा में और ईमानदारी से लागू होते हैं, तो मध्यप्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। आने वाला समय तय करेगा कि यह पहल सिर्फ बैठकों तक सीमित रहती है या सच में प्रदेश की तस्वीर बदलने का कारण बनती है।

