भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अब सरकारी खर्चों पर लगाम कसने के मूड में नजर आ रही है। सरकार ने पहली बार कंप्यूटर, प्रिंटर और दूसरे आईटी उपकरणों की खरीदी पर खर्च की सीमा तय कर दी है। नई गाइडलाइन के मुताबिक अब जरूरत से ज्यादा खरीदी करना आसान नहीं होगा और तय सीमा से अधिक खर्च करने पर विभागों को उच्च स्तर से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी, खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी पैसों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। वित्त विभाग ने सभी विभागों के लिए साफ निर्देश जारी किए हैं कि अब केवल वास्तविक जरूरत के आधार पर ही नई खरीदी की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य आईटी उपकरणों की खरीदी की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये तय की गई है। अगर कोई विभाग इससे ज्यादा राशि खर्च करना चाहता है, तो उसे पहले उच्च स्तर से अनुमति लेनी होगी। अब तक अलग-अलग विभाग अपने हिसाब से खरीदी करते थे, जिसके चलते कई बार जरूरत से ज्यादा सामान खरीदे जाने और संसाधनों की दोहराव वाली खरीद की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नई गाइडलाइन में पुराने कंप्यूटर और प्रिंटर के बेहतर उपयोग, उनकी मरम्मत और आवश्यकता पड़ने पर ही नई खरीदी करने पर जोर दिया गया है। साथ ही सरकार ने खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। अब माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद सरकारी विभागों में अनावश्यक खर्चों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

