भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार में अब मंत्रियों की परफॉर्मेंस को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। आगामी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बीजेपी संगठन ने मंत्रियों के कामकाज का पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार कर लिया है। इस समीक्षा के बाद संगठन बेहद सख्त नजर आ रहा है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों की जहां जमकर तारीफ हुई है, वहीं विवादों में घिरे और कमजोर कामकाज वाले कई मंत्रियों को कड़ी फटकार भी लगी है। सूत्रों की मानें तो खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी तक हो सकती है।
समीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा नाराजगी उन मंत्रियों को लेकर जताई गई जिनके विभागों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। मंत्री विजय शाह को उनके विवादित बयानों और विभागीय कामकाज में कमजोर प्रदर्शन को लेकर निशाने पर लिया गया। प्रतिमा बागरी को अपने ही क्षेत्र में हालात न संभाल पाने और परिवार से जुड़े विवादों के कारण फटकार मिली। नागर सिंह चौहान के खिलाफ क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार और जनता की नाराजगी को गंभीर मुद्दा माना गया।
वहीं संपतिया उइके को जल जीवन मिशन में धीमी कार्यप्रणाली और विभागीय असफलता के लिए जवाब देना पड़ा। एदल सिंह कंसाना पर खाद-बीज संकट और अवैध रेत उत्खनन को लेकर सवाल उठे। गोविंद सिंह राजपूत को गेहूं खरीदी में अव्यवस्था, बारदानों की कमी और किसानों की परेशानी के कारण संगठन की नाराजगी झेलनी पड़ी। नारायण सिंह पंवार की बयानबाजी और पुराने इस्तीफा प्रकरण को लेकर भी संगठन ने नाराजगी जताई।
समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि कुछ वरिष्ठ मंत्री अपने जूनियर मंत्रियों को पर्याप्त जिम्मेदारियां नहीं दे रहे हैं, जिससे विभागीय समन्वय प्रभावित हो रहा है।
हालांकि कई मंत्रियों के काम की खुलकर सराहना भी हुई। चेतन कश्यप को प्रदेश में निवेश बढ़ाने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए तारीफ मिली। धर्मेंद्र लोधी के संगठनात्मक कार्यों और राष्ट्रवाद से जुड़े अभियानों को सराहा गया। राजेंद्र शुक्ला को स्वास्थ्य क्षेत्र में नए प्रयोग और पीपीपी मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए बधाई मिली।
प्रहलाद पटेल को पंचायत सशक्तिकरण और पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सराहा गया। राकेश सिंह की प्रदेश में सड़क नेटवर्क मजबूत करने को लेकर प्रशंसा हुई, हालांकि बैठक में 90 डिग्री ब्रिज को लेकर हल्का-फुल्का मजाक भी हुआ। वहीं राव उदय प्रताप को बोर्ड परीक्षाओं के बेहतर परिणाम और नई परिवहन व्यवस्था लागू करने के लिए मुख्यमंत्री और संगठन दोनों की ओर से सराहना मिली।
अब सबसे बड़ी चर्चा अगले महीने होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर है। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय होगा। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रमोशन मिल सकता है, जबकि लगातार विवादों और खराब कामकाज में घिरे मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है।

