लखनऊ. NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा व्यवस्था और कोचिंग संस्थानों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक ऑनलाइन शिक्षक का वीडियो शेयर करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है कि जिस मामले में जवाबदेही शिक्षामंत्री की बनती है, उसकी सजा शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को क्यों दी जा रही है।
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षक सरकार से अपील करते नजर आ रहे हैं कि कोचिंग व्यवस्था को बंद कराया जाए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। इसी वीडियो को शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जिस घपले-घोटाले की सजा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए, उसकी सजा शिक्षकों को देना कहीं से भी उचित नहीं है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी कमियों, कमजोरियों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए हमेशा किसी और को निशाना बनाती है। उन्होंने कहा कि कभी कुछ मीडिया माध्यमों के जरिए शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स और शिक्षकों पर आरोप लगाए जाते हैं, तो कभी उनके शैक्षणिक संस्थानों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी भवन का निर्माण अवैध है तो उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में वह निर्माण हुआ या जिन्होंने समय रहते उस पर आपत्ति नहीं जताई।
सपा प्रमुख ने मांग की कि संबंधित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और 24 घंटे के भीतर उसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। उन्होंने भाजपा सरकार पर शिक्षा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।
अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनने जा रहे हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों, रिजल्ट विवादों और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि आने वाले समय में शिक्षा सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगी।
NEET विवाद के बीच आया यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक सियासी रंग ले सकता है।

