लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इसी बीच करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह के एक वीडियो को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो को साझा करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है और पूरे मामले पर जवाब मांगा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रियों को लेकर जिस तरह की टिप्पणियां इस वीडियो में सामने आई हैं, वह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि यह वीडियो वास्तविक है या फिर एआई तकनीक के जरिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो फर्जी है तो सरकार को इसकी सच्चाई सामने लानी चाहिए, लेकिन यदि यह सही है तो मुख्यमंत्री को इस पर जवाब देना होगा।
सपा प्रमुख ने कहा कि मंत्रियों का चयन मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में जवाबदेही भी सरकार की बनती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर संबंधित मंत्रियों के नाम ऊपर से तय किए गए थे, तो यह वीडियो भी संबंधित लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से बचा नहीं जा सकता और हर हाल में जवाब देना पड़ेगा।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि मामला केवल किसी एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज विशेष और राजनीतिक दल विशेष का नाम लेकर कथित तौर पर टिप्पणी की गई है। ऐसे में यह दो बड़े समाजों के मान-सम्मान से जुड़ा विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि जिन समाजों का नाम इस विवाद में लिया गया है, उनसे जुड़े जनप्रतिनिधियों और नेताओं को भी खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि संबंधित मंत्री और नेता इस मामले पर चुप्पी साधे रखते हैं, तो जनता यह मान सकती है कि उनके लिए मंत्री पद ज्यादा महत्वपूर्ण है और अपने समाज का सम्मान बाद में आता है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को आपत्तिजनक और निंदनीय बताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
फिलहाल, इस वीडियो की सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या राज्य सरकार की ओर से भी इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में नया सियासी मुद्दा बन सकता है।

