जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आमतौर पर लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के साथ OTP साझा न करें, लेकिन इस बार ठगों ने बिना इन दोनों तरीकों का इस्तेमाल किए ही एक व्यक्ति के बैंक खाते से लाखों रुपये पार कर दिए। इस घटना ने हर मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग उपयोगकर्ता की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक, लॉर्डगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले नितिन शाह, जो एक फैक्ट्री में कर्मचारी हैं, साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके मोबाइल फोन को हैक कर लिया गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। जब तक उन्हें मामले की जानकारी हुई, तब तक उनके खाते से लाखों रुपये गायब हो चुके थे।
बताया जा रहा है कि साइबर ठगों ने 27 मई से 29 मई के बीच बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम दिया। महज दो दिनों के भीतर तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए पीड़ित के बैंक खाते से करीब तीन लाख रुपये निकाल लिए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस दौरान न तो पीड़ित के मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक आया और न ही किसी प्रकार का OTP साझा किया गया।
प्रारंभिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने किसी एडवांस मैलवेयर या स्पाईवेयर तकनीक का इस्तेमाल कर मोबाइल फोन की गतिविधियों पर नियंत्रण हासिल कर लिया होगा। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में मोबाइल एप्लीकेशन की अनुमति, संदिग्ध फाइल डाउनलोड या अन्य तकनीकी खामियां भी कारण बन सकती हैं।
खाते से रकम गायब होने का पता चलने के बाद नितिन शाह ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। लॉर्डगंज थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली है। जांच एजेंसियां अब उन बैंक खातों, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी जानकारियों को खंगाल रही हैं, जिनके माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर की गई। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर पीड़ित का मोबाइल किस तरीके से हैक हुआ।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि साइबर अपराधी लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में केवल लिंक और OTP से सावधान रहना ही काफी नहीं है, बल्कि मोबाइल सुरक्षा, एप डाउनलोड करने में सतर्कता और समय-समय पर बैंक खातों की निगरानी भी बेहद जरूरी हो गई है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस हाईटेक ठगी के पीछे छिपे आरोपियों तक पहुंचा जा सकेगा।

