सिंगरौली।मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। जिला प्रशासन के आदेशों की कथित अनदेखी करना देश की कई बड़ी कंपनियों को भारी पड़ गया है। सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने प्रतिबंधित अवधि के दौरान कोयला परिवहन किए जाने के मामले में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी लॉजिस्टिक्स समेत कई कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद औद्योगिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 23 मई की सुबह 6 बजे से 24 मई की दोपहर 12 बजे तक सड़क मार्ग से फ्लाई ऐश और कोयला परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। यह आदेश जिले में सुचारू यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।
लेकिन आरोप है कि प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद कई बड़ी कंपनियों से जुड़े कोयले से लदे भारी वाहन लगातार सड़कों पर चलते रहे। जांच के दौरान अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी लॉजिस्टिक्स, एपीएमडीसी और टीएचडीसी से जुड़े वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित अवधि में भी सरई और बरगवां क्षेत्र में दर्ज की गई।
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि प्रतिबंध के दौरान इन कंपनियों के चार बड़े कोयला वाहन सरई, झुरही और उज्जैनी मार्ग से होते हुए बरगवां तहसील स्थित मझौली रेलवे साइडिंग तक पहुंच गए। अधिकारियों के अनुसार, इन वाहनों ने करीब 60 किलोमीटर तक सफर करते हुए कोयले का परिवहन किया, जो कलेक्टर के आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कंपनियों और परिवहन एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद कलेक्टर गौरव बैनल ने सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए।
जिन कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें अडानी लॉजिस्टिक्स, एमडीओ अडानी एंटरप्राइजेज, आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एपीएमडीसी, टीएचडीसी, एसीसी लिमिटेड और सृष्टि लॉजिस्टिक्स के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इस कार्रवाई के साथ ही जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, चाहे संबंधित संस्था कितनी भी बड़ी या प्रभावशाली क्यों न हो। कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी कंपनी द्वारा प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना की जाती है, तो केवल एफआईआर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित वाहनों के रूट परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र भी निरस्त किए जा सकते हैं।
सिंगरौली में हुई इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के बड़े उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे इस मामले में जांच किस दिशा में बढ़ती है और संबंधित कंपनियों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

