शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। सनातन परंपराओं में पिंडदान और तर्पण जैसी रस्में आमतौर पर किसी दिवंगत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए की जाती हैं। लेकिन मोहन बड़ोदिया क्षेत्र में एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी को ही सामाजिक रूप से मृत मान लिया और उसका श्राद्ध कर डाला। वजह सिर्फ इतनी थी कि 19 वर्षीय युवती ने अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर लिया था।
जानकारी के मुताबिक, युवती कॉलेज के प्रथम वर्ष की छात्रा है और 2 जून को वह अचानक अपने घर से लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर मोहन बड़ोदिया थाना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। करीब चार दिन बाद, 6 जून को पुलिस ने युवती को सुरक्षित ढूंढ निकाला।
पुलिस की काउंसलिंग के दौरान युवती ने बताया कि वह बालिग है और उसने अपनी इच्छा से दूसरे समाज के एक युवक के साथ प्रेम विवाह किया है। युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से लिया है।
हालांकि, युवती का यह कदम उसके परिवार और समाज के कुछ लोगों को स्वीकार नहीं हुआ। परिवार ने उससे सारे रिश्ते तोड़ने का फैसला लेते हुए उसे सामाजिक रूप से मृत घोषित कर दिया। इसके बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
बताया जा रहा है कि युवती के भाई ने अपनी जिंदा बहन की तस्वीर के सामने बैठकर विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की रस्में पूरी कीं। परिवार ने इन धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि अब उनके लिए बेटी का कोई अस्तित्व नहीं है।
इतना ही नहीं, रस्में पूरी होने के बाद पूजन सामग्री और प्रतीकात्मक अवशेषों को चौमा स्थित लखुंदर नदी में ले जाकर विसर्जित भी किया गया। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें और जानकारी सामने आने के बाद मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस का कहना है कि युवती बालिग है और उसने स्वेच्छा से विवाह करने की बात लिखित रूप से भी कही है। कानूनी तौर पर उसे अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है। हालांकि, परिवार द्वारा जीते-जी बेटी का श्राद्ध किए जाने की घटना ने सामाजिक सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ कानून बालिग युवती के फैसले को मान्यता देता है, तो दूसरी तरफ परिवार की नाराजगी ने रिश्तों को इस हद तक पहुंचा दिया कि उन्होंने अपनी ही बेटी को जीते-जी मृत मान लिया। यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर प्रेम विवाह की कीमत किसी बेटी को अपने ही परिवार से इस तरह का बहिष्कार झेलकर क्यों चुकानी पड़ती है।

