भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मध्य प्रदेश दौरे के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें एक पत्र लिखकर आदिवासी समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। राष्ट्रपति के पांच दिवसीय मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखते हुए विशेष हस्तक्षेप की मांग की है।
अपने पत्र में जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है। प्रदेश में करीब डेढ़ करोड़ से अधिक अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। इसके बावजूद झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में विकास की स्थिति आज भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
जीतू पटवारी ने पत्र में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी समाज की प्रगति का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है, लेकिन आज भी आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता दर राज्य की औसत साक्षरता दर से काफी कम है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी बेटियों की शिक्षा की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, छात्रावासों की हालत खराब है और उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित बनी हुई है। इसके कारण बड़ी संख्या में युवा शिक्षा से दूर होकर असंगठित श्रम क्षेत्र की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है। कुपोषण, एनीमिया, टीबी, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर जैसी समस्याएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विशेष रूप से सहरिया जैसी कमजोर जनजातियों में कुपोषण और टीबी की स्थिति राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
पत्र में बेरोजगारी और पलायन को भी प्रमुख मुद्दा बताया गया। जीतू पटवारी ने कहा कि रोजगार के अवसरों की कमी के कारण आदिवासी युवाओं को पलायन करना पड़ रहा है। वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पारंपरिक रोजगार के साधन कमजोर पड़ते जा रहे हैं और लघु वनोपज के उचित मूल्य तथा विपणन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय आज भी गरीबी, महंगाई, भूमि विवाद, महिलाओं के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी और वनाधिकार से जुड़े संघर्षों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। कई मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा और स्वास्थ्य आपात योजना लागू की जाए। रिक्त शिक्षक, डॉक्टर और पैरामेडिकल पदों पर जल्द भर्ती हो। वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास मिशन शुरू किया जाए। कुपोषण और टीबी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए तथा आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अलग कार्ययोजना बनाई जाए।
इसके अलावा उन्होंने अनुसूचित जनजाति उपयोजना के धन के पारदर्शी उपयोग, आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, इंटरनेट और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय आयोग के गठन की भी मांग की।
बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के दौरान इंदौर, बैतूल, ओंकारेश्वर, जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। 18 जून को बैतूल में आदिवासी समाज से जुड़े कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वे ओंकारेश्वर में दर्शन और आरती करेंगी। 19 जून को अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगी, जबकि 21 जून को जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सहभागिता करेंगी। दौरे के अंतिम दिन 22 जून को राष्ट्रपति कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण कर ग्वालियर के रास्ते नई दिल्ली रवाना होंगी।

