बालाघाट। बालाघाट जिले में एथेनॉल प्लांटों को लेकर सियासत तेज हो गई है। एफसीआई गोदाम से सप्लाई किए गए सरकारी चावल के उपयोग को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही थीं, इसी बीच कांग्रेस के दो विधायकों ने वारासिवनी क्षेत्र की दो प्रमुख एथेनॉल प्लांटों का औचक निरीक्षण कर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे और वारासिवनी विधायक विवेक विक्की पटेल ने जैक्सन बासीगांव और विसाग बायो फ्यूल खापा प्लांट का निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि यह दौरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के निर्देश पर किया गया। हालांकि, दोनों विधायकों ने सरकारी चावल की कथित अनियमितता पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की और कहा कि इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
निरीक्षण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विधायक अनुभा मुंजारे ने आरोप लगाया कि प्लांटों में स्थानीय लोगों की बजाय उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के गोंदिया क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही विधायकों ने प्लांटों में प्रतिदिन होने वाले जल उपयोग, जल संरक्षण की व्यवस्था, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी मांगी। उनका आरोप है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से पूछे गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए।
विधायक अनुभा मुंजारे ने बताया कि जिले के सभी कांग्रेस विधायक इस निरीक्षण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे आगामी कांग्रेस विधायक दल की बैठक में प्रदेश नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
वहीं, विधायक विवेक विक्की पटेल ने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण और श्रम कानूनों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उद्योगों को अपने सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्वों का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन करना होगा।
अब इस निरीक्षण के बाद क्षेत्र में एथेनॉल प्लांटों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। सभी की निगाहें अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट और कांग्रेस द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रतिवेदन पर टिकी हुई हैं।

