छतरपुर। मध्य प्रदेश की केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच रविवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया। छतरपुर जिले के कुपी के पास बनला नदी पर चल रहे ‘चिता आंदोलन’ को पुलिस ने तड़के समाप्त करा दिया। इस दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
जानकारी के मुताबिक, अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। रविवार सुबह करीब 5 बजे भारी पुलिस बल आंदोलन स्थल पर पहुंचा और उन्हें अपने साथ ले गया।
बताया जा रहा है कि अमित भटनागर की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य लोगों को भी वहां से हटाकर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आंदोलन से जुड़ीं सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार ने दावा किया है कि अमित भटनागर रविवार को केन-बेतवा लिंक परियोजना में कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और जानकारी सार्वजनिक करने वाले थे।
दिव्या अहिरवार का आरोप है कि इसी संभावित खुलासे को रोकने के लिए प्रशासन ने सुबह-सुबह कार्रवाई की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
आंदोलनकारियों ने यह भी कहा है कि यदि अमित भटनागर या आंदोलन से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। गौरतलब है कि हिरासत में लिए जाने से कुछ घंटे पहले ही अमित भटनागर ने एक वीडियो जारी कर आशंका जताई थी कि उनके आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त किया जा सकता है।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह कार्रवाई केवल स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर की गई, या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया के बाद ही सामने आ सकेगा।

