भोपाल। छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे ‘चिता आंदोलन’ और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि सरकार असहमति की आवाज को दबाने के लिए दमन का रास्ता अपना रही है।
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने विरोध की हर आवाज को कुचलना अपनी कार्यशैली बना लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों से डरती है, जो सरकार से डरते नहीं हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो या फिर केन-बेतवा लिंक परियोजना में कथित अनियमितताओं, आदिवासी अधिकारों और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे अमित भटनागर और उनके साथियों की गिरफ्तारी, यह सब लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उमंग सिंघार ने बताया कि वे स्वयं 14 जुलाई को आंदोलन स्थल पहुंचे थे और वहां प्रभावित किसानों व आदिवासियों की समस्याओं को सुना था। उन्होंने कहा कि सरकार के पास संवाद का विकल्प था, लेकिन उसने पुलिस बल का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित समझा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र लाठी, गिरफ्तारी और दमन से नहीं, बल्कि संवाद और संविधान से चलता है। उन्होंने अमित भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि सरकार को चाहिए कि वह प्रभावित लोगों की बात सुने और केन-बेतवा परियोजना से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए।
फिलहाल, इस मुद्दे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इसे लेकर सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं।

