भोपाल। मध्य प्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह फैसला संविधान में निहित समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करना है, ताकि महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जा सके और उन्हें समान अधिकार मिल सकें।
नई व्यवस्था के तहत सभी समुदायों के लिए एक विवाह प्रणाली लागू होगी। बहुविवाह और तीन तलाक जैसी व्यवस्थाओं पर रोक रहेगी। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, हालांकि रजिस्ट्रेशन न होने पर विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा।
सरकार ने बच्चों के अधिकारों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। अब कानून में ‘अवैध संतान’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं होगा। चाहे बच्चा विवाह से जन्मा हो, गोद लिया गया हो या किसी अन्य माध्यम से पैदा हुआ हो, सभी को समान कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।
उत्तराधिकार के मामलों में भी बेटा और बेटी दोनों को बराबर का अधिकार मिलेगा। माता और पिता को भी समान रूप से उत्तराधिकारी माना जाएगा। वहीं, कोई भी वयस्क अपनी संपत्ति की सौ प्रतिशत हिस्सेदारी वसीयत के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को दे सकेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट नियम तय किए हैं। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए और यदि किसी पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो इसकी सूचना उनके अभिभावकों को भी दी जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में पूरा अधिकार मिलेगा। यदि महिला पार्टनर को छोड़ दिया जाता है, तो वह भी कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण की मांग कर सकेगी। वहीं, बिना रजिस्ट्रेशन लंबे समय तक साथ रहने या गलत जानकारी देने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान भी रखा गया है।
हालांकि, यह कानून संविधान के तहत संरक्षित अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा। सरकार का कहना है कि उनके पारंपरिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाएगा।
फिलहाल, कैबिनेट की मंजूरी के बाद मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने समान नागरिक संहिता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह नया कानून प्रदेश में किस तरह लागू होता है और इसका आम लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

