सरकारी जमीन पर रिसॉर्ट का खेल? MPIDC के नोटिस के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, अब उठ रहे बड़े सवाल

इंदौर। मध्य प्रदेश के पीथमपुर निवेश क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस जमीन को औद्योगिक विकास के लिए आरक्षित किया गया था, वहां कथित तौर पर एक आलीशान रिसॉर्ट का निर्माण कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी MPIDC ने खुद इस निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

MPIDC के आधिकारिक पत्र के अनुसार, पीथमपुर स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप के सेक्टर-7 में ग्राम सलमपुरा स्थित करीब 1.777 हेक्टेयर भूमि पर बिना अनुमति निर्माण किए जाने का उल्लेख किया गया है। विभाग ने संबंधित पक्ष को सात दिन के भीतर निर्माण हटाने के निर्देश भी दिए थे और चेतावनी दी थी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो निगम स्वयं कार्रवाई करेगा और उसका खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग ने खुद निर्माण को अवैध माना था, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नोटिस सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया, या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसी जमीन पर “नंदी हिल्स रिसॉर्ट” संचालित किया जा रहा था। रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि यहां पार्टियां आयोजित होती थीं और कथित तौर पर अन्य गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आई थीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान भी सामने नहीं आया है।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। सवाल यह भी उठेगा कि उद्योगों के लिए आरक्षित सरकारी जमीन आखिर रिसॉर्ट में कैसे तब्दील हो गई और संबंधित विभागों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?

इस पूरे घटनाक्रम ने MPIDC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निर्माण अवैध था, तो उसे तत्काल हटाया क्यों नहीं गया? और अगर निर्माण वैध था, तो फिर नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?

अब सभी की नजर प्रशासन और MPIDC पर टिकी है। क्या इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाएगी? और सबसे अहम, क्या सरकारी जमीन से जुड़े इस पूरे मामले में सच सामने आ पाएगा?

फिलहाल, यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर प्रशासन का अगला कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

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