शिवपुरी। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक बुजुर्ग फरियादी की मौत के बाद अब प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र विरथरे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सरकारी शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
BJP नेता बोले- समस्या पहले हल हो जाती तो जनसुनवाई में मौत नहीं होती
नरेंद्र विरथरे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, “बुजुर्ग की समस्या का समाधान पहले ही हो जाता तो जनसुनवाई में मौत नहीं होती।” उनकी इस टिप्पणी को प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन ट्रांसफर की समस्या लेकर पहुंचे थे बुजुर्ग
जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग फरियादी उज्ज्वला गैस कनेक्शन ट्रांसफर से जुड़ी समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वह इससे पहले भी अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में आ चुके थे। इस बार भी वह समाधान की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन जनसुनवाई के दौरान उनकी मौत हो गई।
मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं
बुजुर्ग की मौत की वास्तविक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। मौत के कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। हालांकि, इस घटना ने जनसुनवाई की व्यवस्था और आम लोगों की शिकायतों के समय पर समाधान को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
एक शिकायत के लिए बुजुर्ग को बार-बार क्यों आना पड़ा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उज्ज्वला गैस कनेक्शन ट्रांसफर जैसी समस्या के समाधान के लिए एक बुजुर्ग को बार-बार जनसुनवाई का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा? अगर उनकी समस्या समय रहते संबंधित विभाग के स्तर पर ही हल हो जाती, तो क्या उन्हें दोबारा जनसुनवाई में आने की जरूरत पड़ती?
बीजेपी नेता की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मामला अब सिर्फ बुजुर्ग की मौत तक सीमित नहीं रह गया है। यह घटना सरकारी शिकायत निवारण व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और आम लोगों की समस्याओं के समय पर समाधान को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है।

