भोपाल। मध्य प्रदेश में विश्व हिंदू परिषद यानी विहिप के एक नए अभियान को लेकर सियासत गरमा गई है। धर्मांतरण और कथित लव जिहाद के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से विहिप ने मोहल्लों और बस्तियों के स्तर पर निगरानी का नया मॉडल तैयार किया है।
योजना के मुताबिक, हर 10 घरों पर विहिप का एक कार्यकर्ता तैनात किया जाएगा, जिसे अपने इलाके में जागरूकता और निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन का कहना है कि कार्यकर्ता संदिग्ध गतिविधियों, किसी तरह के प्रलोभन या दबाव की जानकारी संगठन और जरूरत पड़ने पर पुलिस तक पहुंचाएंगे।
विहिप का खास फोकस स्लम और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों पर रहेगा। संगठन का दावा है कि इन क्षेत्रों में जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर कुछ बाहरी तत्व धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं।
इसी को देखते हुए बस्तियों में लोगों को सनातन धर्म से जोड़ने और धार्मिक जागरूकता बढ़ाने के लिए हनुमान चालीसा पाठ, सनातन जागरूकता शिविर और धर्म चौपाल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक, संगठन लंबे समय से सनातन धर्म के खिलाफ होने वाली गतिविधियों को लेकर अलग-अलग स्तर पर काम कर रहा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में धर्म की रक्षा और जागरूकता के लिए विहिप का कार्यकर्ता हर घर तक पहुंचेगा।
लेकिन विहिप के इस अभियान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे सीधे चुनावी तैयारी से जोड़ दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी और आरएसएस ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर समाज को बांटना और राजनीतिक फायदा उठाना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है।
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विहिप के अभियान का समर्थन किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि सनातन के खिलाफ होने वाले कथित षड्यंत्रों को रोकने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग संगठन अपने स्तर पर काम करते हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जब भी सनातन की एकता और जागरूकता की बात होती है, कांग्रेस को तकलीफ होने लगती है।
यानी एक तरफ विहिप बस्तियों में अपने कार्यकर्ताओं के जरिए जागरूकता और निगरानी का मॉडल लागू करने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे चुनावी रणनीति बता रही है।
अब सवाल यही है कि हर 10 घरों पर कार्यकर्ता तैनात करने और धर्म चौपाल जैसे आयोजनों का यह मॉडल जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है और आने वाले दिनों में इसका मध्य प्रदेश की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

