भोपाल। भोपाल के चर्चित सिद्धांता अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मरीजों की सुरक्षा और इलाज के तय मानकों में गंभीर खामियां मिलने के बाद अस्पताल का नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पर भी रोक लगा दी गई है। कार्रवाई की खबर सामने आते ही राजधानी के निजी अस्पतालों में भी हड़कंप मच गया है।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की औचक जांच और निरीक्षण के दौरान सिद्धांता अस्पताल में एक-दो नहीं, बल्कि कुल 19 गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल उठाए।
जांच में डायलिसिस यूनिट की व्यवस्थाओं और मशीनों के संचालन में खामियां पाई गईं। इसके साथ ही मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को सही तरीके से सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में भी लापरवाही सामने आई।
इतना ही नहीं, इमरजेंसी में जरूरी ब्लड सैंपल को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप नहीं मिली। ऐसे मामलों में छोटी सी लापरवाही भी मरीज के इलाज को प्रभावित कर सकती है।
जांच के दौरान अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में जरूरी जीवनरक्षक उपकरणों की कमी भी सामने आई। वहीं ड्यूटी पर डॉक्टरों की उपलब्धता भी तय मानकों के मुताबिक नहीं पाई गई।
अस्पताल के ICU, एक्स-रे विभाग और डायलिसिस यूनिट में भी कई व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके अलावा फायर सेफ्टी से जुड़े सुरक्षा इंतजामों में भी नियमों की अनदेखी सामने आई।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ये कमियां मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं के मानकों से सीधे जुड़ी हुई हैं। इसी के चलते विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस निरस्त कर दिया।
अब बड़ा सवाल यही है कि इतने गंभीर स्तर की खामियां अस्पताल की नियमित व्यवस्था और निगरानी में आखिर कैसे बनी रहीं? क्या समय रहते इन कमियों को दूर करने के लिए कार्रवाई नहीं की गई?
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद सिद्धांता अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन इन सभी कमियों को किस तरह दूर करता है और स्वास्थ्य विभाग आगे क्या कदम उठाता है।

