इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। कहीं दूध की मौके पर ही रैपिड टेस्टिंग हो रही है, तो कहीं डेयरी और खाद्य प्रतिष्ठानों से दूध, पनीर और मेवों के सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है।
इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने ‘TRIPLE T यानी Trust Through Testing’ अभियान के तहत ‘Food Safety on Wheels’ और ‘Rapid Milk Testing Kit’ की मदद से दूध की ऑन द स्पॉट जांच की।
विभाग की टीम ने श्री कृष्णा दूध डेयरी, वृंदावन डेयरी, फार्मर्स मिल्ककार्ट, श्री जी दूध डेयरी, कृष्णा मिल्क सेंटर और महावीर दूध डेयरी समेत कई स्थानों पर जांच की। इसके अलावा 8 से 10 दूध फेरी वालों के दूध के सैंपल भी मौके पर ही टेस्ट किए गए।
शुरुआती रैपिड टेस्ट में राहत की बात यह रही कि जांच किए गए दूध के सैंपलों में किसी तरह की मिलावट नहीं मिली। हालांकि विभाग जरूरत पड़ने पर सैंपलों की लैब जांच भी कराएगा, ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की पूरी तरह पुष्टि की जा सके।
वहीं राजधानी भोपाल में भी खाद्य विभाग की टीमों ने सैंपलिंग अभियान तेज कर दिया है। पिपलानी के गांधी मार्केट स्थित फ्रेश्को डेयरी पर टीम ने कार्रवाई करते हुए गाय, भैंस और मिक्स दूध के सैंपल लिए। इसके साथ ही काजू और कढ़ाई पनीर के सैंपल भी जांच के लिए एकत्र किए गए हैं।
इन सैंपलों की रैपिड किट के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लैब में भी जांच कराई जाएगी। यानी विभाग अब सिर्फ शिकायत मिलने का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि बाजार में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच कर रहा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि अभियान का मकसद केवल मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि खाद्य कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को भी जागरूक करना है।
‘Food Safety on Wheels’ के जरिए लोगों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की आसान जांच के तरीके भी बताए जा रहे हैं, ताकि उपभोक्ता खुद भी मिलावट को लेकर सतर्क रह सकें।
फिलहाल इंदौर और भोपाल में चल रहे इस अभियान से साफ है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि आगे होने वाली लैब जांच में क्या तस्वीर सामने आती है और मिलावट पाए जाने पर विभाग की कार्रवाई कितनी सख्त होती है।

