भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं के बीच शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ भोपाल के नीलम पार्क में चयनित अभ्यर्थी पिछले 14 दिनों से पद बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार ने अगले दो साल में सिर्फ 18 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात कही है।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने साफ कहा है कि एक साथ प्रदेश के सभी खाली पदों पर भर्ती करना संभव नहीं है। उनके मुताबिक अगले दो साल में करीब 18 हजार पदों पर ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
भर्ती में देरी और सीमित पदों को लेकर मंत्री ने तकनीकी वजहों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण की गणना करनी होती है। इसके अलावा बैकलॉग के पद और 13 प्रतिशत ओबीसी पदों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक काम कर रहे हैं, जिन्हें कई बार सामान्य तौर पर खाली पदों की संख्या में शामिल कर लिया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि जितने पद वास्तव में खाली हैं, उन्हें भरा जाए।
लेकिन सरकार के इस बयान ने इसलिए भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि हाल ही में विधानसभा में शिक्षा विभाग ने एक सवाल के जवाब में प्रदेश में करीब सवा लाख पद खाली होने की जानकारी दी थी।
ऐसे में अब सवाल यह है कि जब खाली पदों की संख्या इतनी ज्यादा बताई जा रही है, तो अगले दो साल में सिर्फ 18 हजार पद ही क्यों भरे जाएंगे?
इधर भोपाल के नीलम पार्क में वर्ग 1, वर्ग 2 और वर्ग 3 के चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। वर्ग 2 और वर्ग 3 के चयनित अभ्यर्थी पिछले 14 दिनों से राशन-पानी लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाई जाए। वर्ग 2 में प्रत्येक विषय के लिए 2 हजार पद और वर्ग 3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग की जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती और पदवृद्धि का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि 14 दिन से आंदोलन चलने के बावजूद शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी अब तक प्रदर्शनकारी चयनित अभ्यर्थियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा है।
अब एक तरफ सरकार वास्तविक रिक्त पदों को भरने की बात कर रही है और दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी ज्यादा पदों की मांग को लेकर सड़क पर हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में शिक्षक भर्ती का यह मुद्दा सरकार के लिए कितना बड़ा सिरदर्द बनता है, यह देखने वाली बात होगी।

