ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार गोपाल मंदिर में होने वाला राधा-कृष्ण का श्रृंगार खास वजह से चर्चा में है। सिंधिया रियासतकालीन करीब 105 साल पुराने ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण का श्रृंगार ऐसे बेशकीमती एंटीक आभूषणों से किया जाएगा, जिनकी कीमत करीब 120 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
सबसे खास बात ये है कि इन ऐतिहासिक आभूषणों को साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी के मौके पर बैंक लॉकर से बाहर निकाला जाता है और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर में लाया जाता है।
जन्माष्टमी के दिन दोपहर करीब 12 बजे इन बेशकीमती आभूषणों को कड़ी सुरक्षा के बीच बैंक लॉकर से गोपाल मंदिर पहुंचाया जाएगा। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर और आसपास के पूरे इलाके में 150 से ज्यादा सशस्त्र सुरक्षाकर्मी और पुलिस बल तैनात रहेगा, जबकि सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे परिसर और आभूषणों के आने-जाने वाले रास्ते पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
अब बात करते हैं उन आभूषणों की, जिनसे भगवान राधा-कृष्ण का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। इनमें हीरे और जवाहरात से जड़ा शुद्ध सोने का मुकुट, पन्ने और मोतियों से बना आकर्षक हार और 62 प्राकृतिक मोतियों की दुर्लभ माला शामिल है।
इसके अलावा भगवान के लिए सोने की बांसुरी, नथ, कंठी और हीरे जड़े कंगन भी तैयार रहेंगे। भगवान के सिर पर विशाल चांदी का छत्र सजाया जाएगा, वहीं पूजा में इस्तेमाल होने वाले करीब 50 किलो चांदी के पौराणिक पात्र भी इस विशेष अवसर का हिस्सा होंगे।
इन ऐतिहासिक और बेशकीमती आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण के दुर्लभ स्वरूप के दर्शन के लिए सिर्फ ग्वालियर ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
जन्माष्टमी की पूजा और दर्शन के बाद 24 घंटे पूरे होते ही इन करोड़ों के ऐतिहासिक आभूषणों को दोबारा कड़ी सुरक्षा के बीच बैंक लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाएगा।
यानी साल में सिर्फ एक बार मिलने वाला ये मौका श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ इतिहास और राजघराने की विरासत को करीब से देखने का भी अवसर होगा।

