नर्मदापुरम में बदहाल सड़क पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, भोपाल-बैतूल फोरलेन पर चक्काजाम

इटरासी। नर्मदापुरम जिले में बदहाल सड़क को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर आ गया। इटारसी से ग्राम लोहारिया तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क गड्ढों में तब्दील होने से परेशान सैकड़ों ग्रामीण भोपाल-बैतूल फोरलेन पर पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया।

ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग रखी कि इटारसी से लोहारिया तक खराब हो चुकी सड़क पर तत्काल पेचवर्क शुरू कराया जाए। करीब 20 मिनट तक फोरलेन का एक हिस्सा बाधित रहा। इसी दौरान गंभीर हालत में एक महिला मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई।

दरअसल, एक दिन पहले ही इटारसी से सटे करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन को धरना और चक्काजाम करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे लोहारिया कलां, ग्वाड़ी खुर्द, तारारोड़ा, कांदई और सोमलबाड़ा समेत कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण लोहारिया फोरलेन पर पहुंच गए।

मौके पर एसडीएम निलेश शर्मा, एसडीओपी वीरेंद्र कुमार मिश्रा और तहसीलदार की मौजूदगी में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों की मांग थी कि इटारसी से लोहारिया तक बदहाल सड़क का काम जल्द शुरू किया जाए और तत्काल पेचवर्क कराया जाए।

ग्रामीण अधिकारियों से लिखित आश्वासन की मांग कर रहे थे, लेकिन जब एसडीएम ने लिखित आश्वासन देने से इनकार किया तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण फोरलेन पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया।

चक्काजाम के दौरान गंभीर हालत में महिला मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस को जाम से बाहर निकलवाया।

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। इसके बाद एसडीएम निलेश शर्मा ने संबंधित विभाग के अधिकारी से चर्चा की और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि आज शाम या फिर कल सुबह से सड़क पर पेचवर्क का काम शुरू कर दिया जाएगा।

प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने करीब 20 मिनट बाद चक्काजाम समाप्त कर दिया और यातायात फिर से शुरू हो गया।

हालांकि ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय पर सड़क का काम शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन का आश्वासन जमीन पर कब तक उतरता है और ग्रामीणों को गड्ढों से कब राहत मिलती है।

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