भोपाल। मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा में जहरीली शराबकांड के बाद हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ सरकार ने प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बीच कई अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है, तो दूसरी तरफ गुस्साए ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मृतकों के शव सड़क पर रखकर सागर-छतरपुर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
मामले में आबकारी उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से ग्वालियर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। इसके अलावा सागर की सहायक आयुक्त आबकारी कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत की आबकारी उप निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित किया गया है।
कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। सागर के गूगरा चौकी प्रभारी और बंडा थाना प्रभारी को भी निलंबित कर दिया गया है। सरकार की इस कार्रवाई के बाद साफ है कि मामले में प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश शुरू हो गई है।
इधर बंडा में मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। लोगों ने शव सड़क पर रखकर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। इसके चलते सागर-छतरपुर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारी पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवजा देने के साथ ही अवैध शराब के मुख्य आरोपियों और कथित संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वहीं जहरीली शराब के सेवन से बीमार लोगों को बंडा से सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने का सिलसिला जारी है। अस्पताल प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है और डॉक्टरों की विशेष टीम मरीजों के इलाज में जुटी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस जहरीली शराबकांड की पूरी जिम्मेदारी किसकी तय होती है और अवैध शराब के नेटवर्क पर सरकार की कार्रवाई कितनी दूर तक पहुंचती है।

