ग्वालियर। गुवाहाटी स्थित लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन यानी LNIPE में छात्रा श्रुति की मौत के मामले को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। ‘जस्टिस फॉर श्रुति’ की मांग को लेकर छात्रों ने लगातार दूसरी रात भी धरना प्रदर्शन जारी रखा। इसी दौरान छात्रों ने श्रुति को न्याय दिलाने की मांग के साथ कैंडल मार्च भी निकाला। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और श्रुति के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
दरअसल, कोलकाता निवासी 21 वर्षीय श्रुति गुवाहाटी स्थित LNIPE में थर्ड ईयर की छात्रा थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत की खबर सामने आने के बाद संस्थान के छात्रों में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों छात्र धरने पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि श्रुति की मौत को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान में भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। छात्रों की मांग है कि भोजन की गुणवत्ता बेहतर की जाए, छात्रों के स्वास्थ्य परीक्षण को गंभीरता से लिया जाए और श्रुति की मौत के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
श्रुति की मौत के बाद LNIPE प्रबंधन की ओर से भी तत्काल कार्रवाई की गई थी। संस्थान की वाइस चांसलर ग्वालियर से गुवाहाटी ब्रांच के लिए रवाना हुई थीं। वहीं वार्डन और डॉक्टरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई है। इसके बावजूद छात्रों का कहना है कि जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से नहीं होती और उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग श्रुति के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की है। वहीं प्रबंधन छात्रों की मांगों पर विचार कर रहा है और धरने पर बैठे छात्रों के भोजन समेत अन्य व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि श्रुति की मौत की जांच में क्या सामने आता है, जिम्मेदारी किसकी तय होती है और छात्रों की 50 लाख रुपये मुआवजे समेत बाकी मांगों पर प्रबंधन और प्रशासन क्या फैसला लेते हैं।

