भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश में करीब दो दशक से बंद पड़ी राज्य परिवहन बस सेवा को एक बार फिर नई शुरुआत मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि 25 सितंबर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सेवा यात्रियों के साथ-साथ बस ऑपरेटरों, सरकार और नई तकनीक से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर लेकर आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा 11 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट 2026 के दौरान की। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समिट का शुभारंभ किया और लोगो प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी दिए। बिहार के सुधाकर कुमार को प्रथम पुरस्कार के रूप में 5 लाख रुपये, नई दिल्ली के चयन वोहरा को दूसरा पुरस्कार 2 लाख रुपये और मुंबई की गौरांगी शर्मा को तीसरा पुरस्कार एक लाख रुपये दिए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने समिट की स्मारिका, मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी MPYPIL का लोगो और विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनोवेशन चैलेंज प्रतियोगिता की घोषणा की गई और MPYPIL तथा रैपिडो के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू भी हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान शुरू होगा, जो 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसी सेवा संकल्प के दौरान 25 सितंबर को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में दशकों से बंद राज्य परिवहन बस सेवा को दोबारा शुरू करना अगले 20 वर्षों में परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव का अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में हाईस्पीड ट्रेन, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और हाईस्पीड हाईवे का नेटवर्क तेजी से तैयार हो रहा है। मध्यप्रदेश भी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन आम लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई व्यवस्था तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा बसें और करीब 5 लाख किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क मौजूद है। नई सुगम परिवहन बस सेवा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिल रहा है और मध्यप्रदेश में बने इलेक्ट्रिक व्हीकल इंजन देश-दुनिया तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सुगम परिवहन व्यवस्था के तहत यात्रियों को टू-व्हीलर से बस सेवा तक आसानी से पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके लिए कार्यक्रम के दौरान रैपिडो के साथ एमओयू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रदेश में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। उनके मुताबिक उज्जैन में पहले जहां सालाना 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं अब यह संख्या 8 करोड़ से ज्यादा पहुंच चुकी है और इस साल 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। वहीं प्रदेश में हर साल 20 करोड़ से ज्यादा पर्यटकों के आने की बात भी उन्होंने कही।
परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सुगम यात्री परिवहन सेवा प्रदेश के लिए ऐतिहासिक अवसर है और इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले साल 1 अप्रैल को प्रदेश में सुगम परिवहन यात्री बस सेवा शुरू करने की मंजूरी दी गई थी और अब बस ऑपरेशन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को जमीन पर उतारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से यात्रियों के साथ बस ऑपरेटरों को भी फायदा मिलेगा।
परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 में राज्य सड़क परिवहन निगम की सेवाएं स्थगित हो गई थीं और इसके बाद करीब 20 वर्षों तक प्रदेश में निजी ऑपरेटरों के जरिए बसों का संचालन होता रहा। अब राज्य स्तर पर यात्री परिवहन कंपनी का गठन किया गया है। सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाई गई हैं और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में परिवहन सलाहकार समितियां गठित की गई हैं।
अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के करीब 55 जिलों के रूट का सर्वे किया जा चुका है। इसमें 150 सिटी बस रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 इंटरस्टेट रूट शामिल हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में सीसीटीवी कैमरे, ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, पैनिक बटन, जीपीएस और लाइव लोकेशन जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
नई बस सेवा में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन कंपनी में भर्ती की प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन और टीसीएस के माध्यम से की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि देशभर के युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यात्री परिवहन प्रदेश की बड़ी समस्याओं में से एक रहा है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से इसे दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के जरिए क्लीन और सेफ बस सिस्टम तैयार किया जाएगा, जो गांवों को शहरों से जोड़ेगा। उनके मुताबिक इससे हर साल करीब 70 हजार टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मदद मिल सकती है।
वहीं, एका मोबिलिटी के चेयरमैन सुधीर मेहता ने बताया कि उनकी कंपनी पीथमपुर में इलेक्ट्रिक बसों का पांचवां कारखाना शुरू करने जा रही है। उनके मुताबिक यह देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस कारखानों में से एक होगा, जहां सालाना करीब 5 हजार बसों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सोलर सरप्लस राज्य होने से इलेक्ट्रिक वाहनों को भी फायदा मिलेगा।
यात्री परिवहन विजन समिट में बस परिवहन, तकनीक, स्टार्टअप, एआई और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। ऑल इंडिया बस एंड कार कन्फेडरेशन के अध्यक्ष प्रसन्ना पटवर्धन ने कहा कि देशभर में बस परिवहन रोजाना करीब 40 करोड़ लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है और मध्यप्रदेश सार्वजनिक परिवहन में पीपीपी मॉडल के जरिए नई पहल करने वाला राज्य बन रहा है।
कुल मिलाकर, 25 सितंबर से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा को मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि नई बस सेवा जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है, यात्रियों को इसका कितना फायदा मिलता है और करीब दो दशक बाद शुरू होने वाली यह व्यवस्था प्रदेश के गांवों, शहरों और पर्यटन स्थलों को किस हद तक बेहतर तरीके से जोड़ पाती है।

